तो इधर शाहबाज शरीफ के पास भी जनाधार नहीं है. जिसको लेकर पाकिस्तान के अलग-अलग प्रांतों में विवाद है.
एक लेख और विवाद शुरू हो गया
वरिष्ठ पत्रकार सोहेल वाराइच ने सेना के सूत्रों के हवाले से बताया कि आसिम मुनीर को एक आदमी की तलाश है. जो पाकिस्तान को प्रभावी ढंग से चला सकते हैं. एक बार वह व्यक्ति मिल गया तो शाहबाज शरीफ और बिलावल भुट्टो जैसे नेता किनारे कर दिये जायेंगे. सोहेल के लेख पर पाकिस्तानी सेना ने कोई टिप्पणी नहीं की है. वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि मुनीर और शाहबाज शरीफ के रिश्ते अब अच्छे चल रहे हैं.
शाहबाज शरीफ का खुला विरोध
सोहेल वराइच के मुताबिक, शाहबाज शरीफ के आने के बाद सेना को काम करने की काफी आजादी मिल गई है. लेकिन शाहबाज शरीफ का जनता पर कोई प्रभाव नहीं है. खैबर पख्तूनख्वा, गिलगित, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और सिंध जैसे प्रांतों में शाहबाज शरीफ का खुला विरोध हो रहा है. जनता उनकी अपीलों पर ध्यान देने से इनकार कर रही है. इमरान खान शाहबाज शरीफ के खिलाफ व्यापक जन विरोध को हवा दे रहे हैं।
तिराह घाटी में सैन्य अभियान शुरू हुआ
इसके चलते सेना को अपने ऑपरेशन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. हाल ही में सेना को खैबर की तिराह घाटी में सैन्य अभियान शुरू करने के लिए जिरगा बैठक बुलानी पड़ी. सरकार वहां के लोगों को समझाने में नाकाम रही. जिरगा बैठक में काफी समय लगा और तब तक पाकिस्तान विरोधी दंगाई सुरक्षित थे। वाराइच आगे लिखते हैं कि शाहबाज़ शरीफ़ और उनकी पार्टी को पंजाब के अलावा पाकिस्तान में कहीं भी ज़्यादा जनसमर्थन नहीं है.