प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा सिर्फ एक कूटनीतिक यात्रा नहीं है, बल्कि दोनों देशों के संबंधों में एक ‘ऐतिहासिक क्षण’ साबित हो रही है। इज़रायली मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक इस बैठक को एक “रणनीतिक पुनर्गठन” के रूप में देख रहे हैं जो आने वाले दशकों के लिए दोनों देशों की नियति को एक साथ बांध देगा।
येरुशलम में भव्य स्वागत और ‘नमस्ते’ का नारा
इजराइल में पीएम मोदी के लिए उत्साह अभूतपूर्व है. येरूशलम की सड़कों पर लहराते भारत और इजराइल के झंडे और हर भारतीय का “नमस्ते” के साथ गर्मजोशी से स्वागत दोनों देशों के बीच गहरी दोस्ती का सबूत है। इजरायली संसद ‘नेसेट’ को भारत के सम्मान के प्रतीक भारतीय तिरंगे के रंग में रोशन किया गया है। गौरतलब है कि इजरायल का विपक्ष भी इस यात्रा का स्वागत कर रहा है, जो भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति की स्वीकृति है।
रणनीतिक साझेदारी और रक्षा सौदे
इस यात्रा के दौरान भारत-इज़राइल संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” के उच्चतम स्तर पर ले जाया जाएगा। यह दर्जा इज़रायल के सबसे करीबी सहयोगियों जैसे अमेरिका और जर्मनी के समान होगा।
रक्षा: दोनों देश उन्नत हथियार प्रणालियों के संयुक्त उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
प्रौद्योगिकी: एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा में उच्च स्तरीय सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
गुप्त प्रणाली: भारत और इज़राइल एक विशेष गुप्त प्रणाली स्थापित करेंगे, जिससे रक्षा सहयोग की नई श्रेणियां खुलेंगी जो पहले कभी उपलब्ध नहीं थीं।
दुश्मन देशों के लिए खतरे की घंटी
भारत और इजराइल के बीच बढ़ती ये नजदीकियां पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों के लिए चिंता का विषय बन गई है. उन्नत रक्षा तकनीक और ‘संकट में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की भावना’ दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है।
व्यक्तिगत मित्रता: ‘ब्रोमांस’ का प्रभाव
पीएम मोदी और पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बीच पर्सनल केमिस्ट्री जगजाहिर है. समुद्र तट पर घूमते हुए उनकी तस्वीरों से लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ‘ए लुक बैक’ वीडियो तक, यह दोस्ती दोनों देशों के हितों को मजबूत कर रही है। नेतन्याहू ने भारत को “गठबंधन के षट्कोण” का केंद्रीय स्तंभ बताया है।