मध्य पूर्व में भीषण युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक बेहद अहम और रणनीतिक कदम उठाया है. ईरान ने दुनिया के कई देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का दरवाजा खोल दिया है। खास तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों और दबाव के बावजूद यूरोपीय देशों ने इस युद्ध में अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया है और ईरान ने उन्हें बड़ा ऑफर दिया है.
यूरोपीय देशों का रुख और ईरान की पेशकश
फ्रांस, इटली, स्पेन और ब्रिटेन जैसे प्रभावशाली देशों ने साफ कर दिया है कि वे ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते हैं. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस मुद्दे पर 35 देशों की बैठक बुलाने का भी प्रस्ताव रखा है. इस स्थिति का फायदा उठाते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि जो देश ईरान के साथ अच्छे संबंध रखेंगे, उन्हें होर्मुज मार्ग से व्यापार करने की अनुमति दी जाएगी। चीन, रूस, भारत और पाकिस्तान के बाद अब ईरान यूरोपीय देशों के साथ इस मार्ग के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है।
तेल परिवहन के लिए नए विकल्प
युद्ध के कारण होर्मुज़ का रास्ता ख़तरनाक हो गया है, खाड़ी देशों ने वैकल्पिक रास्तों की तलाश शुरू कर दी है। इराक और सीरिया के बीच एक अहम समझौता हुआ है, जिसके तहत अब इराकी तेल सीरिया के रास्ते भूमध्य सागर तक पहुंचाया जाएगा। दूसरी ओर, कतर के उत्पाद अब सऊदी अरब के जेद्दा बंदरगाह के माध्यम से अफ्रीका और यूरोप में निर्यात किए जा रहे हैं। जेद्दा का बंदरगाह अब पश्चिमी एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का एक प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
अमेरिका के लिए बढ़ती मुश्किलें
ईरान के साथ संघर्ष के साथ-साथ अमेरिका को अब इराक में भी संकट का सामना करना पड़ रहा है। इराक में सक्रिय स्थानीय समूहों और शिया मिलिशिया द्वारा अमेरिकी प्रतिष्ठानों पर हमले तेज हो गए हैं। बगदाद में 104 एकड़ में फैला अमेरिकी दूतावास अब सुरक्षित नहीं है, जिसके चलते अमेरिका ने अपने नागरिकों को इराक छोड़ने की चेतावनी दी है।