ईरान युद्ध: होर्मुज की नाकाबंदी का सबसे ज्यादा असर ग्रीस, यूएई और चीन पर, भारत भी चिंतित

Neha Gupta
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ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी ने दुनिया भर में समुद्री परिवहन को बाधित कर दिया है। हाल ही में ब्लूमबर्ग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात, ग्रीस और चीन जैसे देशों की शिपिंग कंपनियों को इस संकट में अमेरिका से भी ज्यादा आर्थिक नुकसान हो रहा है।

किस देश के कितने जहाज फंसे?

होर्मुज के पश्चिम में फंसे लगभग 670 मालवाहक जहाजों के डेटा विश्लेषण से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सबसे अधिक प्रभावित देश है। इसके कुल जहाजों का 18 फीसदी यानी 120 जहाज. जबकि ग्रीस इस सूची में दूसरे स्थान पर है। ग्रीस की कंपनियों के 75 जहाज वहां फंसे हुए हैं, जिनमें करीब 30 तेल और गैस टैंकर भी शामिल हैं. इस क्षेत्र में 74 चीनी जहाज हैं, जिनमें से 25 तेल-गैस टैंकर हैं और बाकी कंटेनर जहाज हैं। इस डेंजर जोन में जापान के 39 और हांगकांग के 25 जहाज मौजूद हैं.

भारत की स्थिति

इस इलाके में भारतीय कंपनियों के 24 तेल और गैस जहाज फंसे हुए हैं। हालांकि राहत की बात ये है कि युद्ध के दौरान भारत के 13 जहाज इस इलाके से सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे. माना जा रहा है कि ईरान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों के कारण भारत जैसे देशों के जहाजों को ‘सुरक्षित मार्ग’ मिल रहा है।

तेल और गैस आपूर्ति को ख़तरा

50 बड़े कच्चे तेल वाहक (वीएलसीसी) और 11 गैस वाहक वर्तमान में होर्मुज में फंसे हुए हैं। अगर ये नाकाबंदी लंबे समय तक जारी रही तो एशियाई देशों में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है. दक्षिण कोरिया की 7, चीन-जापान की 6-6 और ग्रीस की 5 जहाजें वहां खड़ी हैं।

किसे निशाना बनाया गया?

रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक जिन जहाजों पर हमला हुआ है या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिली है, उनमें से आधे से ज्यादा जहाज यूरोप या अमेरिका से जुड़े थे। बढ़ती बीमा दरों और जीवन के जोखिम के कारण सैकड़ों जहाज वर्तमान में युद्ध विराम की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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