पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को देखते हुए लोगों के मन में एक ही सवाल है कि क्या दुनिया एक विनाशकारी मोड़ पर है। नास्त्रेदमस ने अपने लेखन में कहीं भी सीधे तौर पर ‘2026’ या ‘तीसरे विश्व युद्ध’ का जिक्र नहीं किया, लेकिन उन्होंने जिस ‘वैश्विक उथल-पुथल’ और ‘बड़े युद्धों’ का सुझाव दिया था, उसे आज के ईरान-इजरायल-अमेरिका संकट से जोड़ा जा रहा है।
क्या आसमान छूएंगी सोने-चांदी की कीमतें?
आमतौर पर जब भी युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की ओर रुख करते हैं, जिससे कीमतों में बढ़ोतरी होती है। हालाँकि, मौजूदा बाज़ार कुछ और ही संकेत दे रहा है। युद्ध के बावजूद, मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ब्याज दरों के कारण सोने की कीमत कभी-कभी गिर गई है। इससे साबित होता है कि बाजार किसी रहस्यमय पूर्वानुमान के बजाय वास्तविक आर्थिक कारकों (बैंक नीतियों और मुद्रास्फीति) पर अधिक निर्भर करता है।
तृतीय विश्व युद्ध का डर और सच्चाई
नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों को तीसरे विश्व युद्ध से जोड़कर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर डर फैलाया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नास्त्रेदमस की रचनाएं अत्यधिक प्रतीकात्मक हैं और उनकी अपनी समझ के अनुसार व्याख्या की जाती है। अब तक उनकी कई भविष्यवाणियों के सच होने का दावा किया जाता है, लेकिन युद्ध का सही समय या तारीख कहीं भी स्पष्ट नहीं है।
शेयर बाज़ार और निवेशकों के लिए सलाह
शेयर बाज़ार में बड़ी गिरावट की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि युद्ध से वैश्विक आपूर्ति शृंखला और कच्चे तेल की कीमतें प्रभावित होती हैं। आर्थिक विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को डर या पूर्वानुमान के आधार पर निर्णय लेने के बजाय सटीक डेटा और बाजार के रुझान पर ध्यान देना चाहिए।