अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए नाटो देशों पर आरोप लगाया है कि वे मध्य पूर्व में ईरान के खिलाफ चल रही अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से दूर रहना चाहते हैं. ट्रंप ने कहा कि ज्यादातर नाटो सहयोगियों ने ऑपरेशन में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जबकि वे अमेरिकी कार्रवाई से सहमत हैं.
नाटो देशों की सुरक्षा के लिए अमेरिका हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है
ट्रंप के बयान के मुताबिक, कई देशों का मानना है कि ईरान को किसी भी तरह से परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए, फिर भी वे सीधे सैन्य भागीदारी से बच रहे हैं. उन्होंने इस स्थिति पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि नाटो हमेशा एक तरफा प्रणाली की तरह प्रतीत होता है, जिसमें अमेरिका अन्य देशों की सुरक्षा पर भारी खर्च करता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर पर्याप्त सहायता नहीं देता है।
अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में बहस तेज़ हो गई
ट्रंप ने आगे कहा कि नाटो देशों की सुरक्षा के लिए अमेरिका हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है, फिर भी संकट के समय ये देश पीछे हट जाते हैं. उन्होंने इस प्रवृत्ति को आश्चर्यजनक नहीं बताया और कहा कि यह पहले से ही उनका विश्वास था। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बहस तेज़ हो गई है. नाटो देशों की भूमिका, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान मुद्दे पर वैश्विक सहयोग को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। ट्रंप के इस बयान से अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच रिश्तों पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है.
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