पश्चिम एशिया में पिछले 12 दिनों से चल रहे भीषण सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है। विशेष रूप से, होर्मुज जलडमरूमध्य में बनाई गई नाकाबंदी ने तेल की कीमतों को बढ़ावा दिया है। ऐसी कठिन परिस्थिति में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए अमेरिका ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और रणनीतिक निर्णय लिया है। व्हाइट हाउस ने भारत को समुद्र के रास्ते रूसी कच्चा तेल खरीदने और उसे भारतीय बंदरगाहों तक लाने की विशेष अनुमति दी है।
व्हाइट हाउस का स्पष्टीकरण
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक आधिकारिक बयान में फैसले के पीछे के वास्तविक कारणों के बारे में बताया। उन्होंने कहा, भारत बहुत विश्वसनीय और मजबूत रणनीतिक साझेदार रहा है। अमेरिका ने यह रियायत इसलिए दी है क्योंकि भारत ने पहले रूसी तेल की खरीद में उल्लेखनीय कमी करके अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का सम्मान किया था।
फैसले के पीछे मुख्य कारण:
अस्थायी कमी से राहत: ईरान और इजराइल के बीच युद्ध के कारण बाजार में तेल की कमी को पूरा करने के लिए यह निर्णय लिया गया।
रूस को न्यूनतम लाभ: चूंकि यह तेल पहले से ही पारगमन में है, इसलिए इसकी बिक्री से रूस को कोई नया या बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की संभावना नहीं है।
भारतीय रिफाइनरियों की सुरक्षा: अमेरिका ने यह सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया है कि भारतीय रिफाइनरियों को अब कच्चे तेल की कमी का सामना न करना पड़े।
भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम
इस फैसले से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में काफी मदद मिलेगी। जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों को ईंधन राशनिंग का सामना करना पड़ रहा है, अमेरिका की यह रियायत भारत की मजबूत विदेश नीति और राजनयिक संबंधों की सफलता को दर्शाती है।
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