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वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आज यानी 10 तारीख को बड़ी गिरावट देखने को मिली है। एशिया में शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड लगभग 8.5% गिरकर 92.50 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इससे पहले कल यह 115 डॉलर के करीब पहुंच गया था। जबकि अमेरिकी तेल (WTI) भी करीब 9% गिरकर 88.60 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। तेल की कीमतों में यह गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा. 11 दिन में कच्चे तेल के दाम, ट्रंप ने कहा- जल्द खत्म होगी जंग कच्चे तेल की कीमतों में इस गिरावट की मुख्य वजह डोनाल्ड ट्रंप का ताजा बयान माना जा रहा है. सोमवार को ट्रंप ने कहा कि जारी युद्ध ‘बहुत जल्द’ ख़त्म हो जाएगा. उनके बयान से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर अनिश्चितता कम हुई है और निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। हालाँकि, मौजूदा कीमतें अभी भी युद्ध-पूर्व स्तरों से लगभग 30% अधिक हैं। एशियाई शेयर बाजारों में तेजी, निक्केई में 2.8% की बढ़त तेल की कम कीमतों का एशियाई शेयर बाजारों पर सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जापान का बेंचमार्क इंडेक्स निक्केई 225 मंगलवार सुबह करीब 2.8% ऊपर कारोबार कर रहा था। वहीं, साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 5% से ज्यादा उछला। विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ता तेल एशियाई अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर का काम करता है क्योंकि क्षेत्र के अधिकांश देश खाड़ी देशों से तेल के बड़े खरीदार हैं। भारत जैसे तेल आयातकों को मिलेगी राहत एशियाई बाजारों में तेजी के पीछे एक बड़ा कारण यह है कि हाल के दिनों में तेल की बढ़ती कीमतों ने इन देशों की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है। भारत, चीन और जापान जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर हैं। तेल सस्ता होने से इन देशों का आयात बिल कम होगा और महंगाई पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. युद्ध के कारण 30% तक बढ़ी कीमतें बता दें कि पिछले कुछ समय से चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका थी. इसी वजह से कीमतें लगातार बढ़ रही थीं. संघर्ष की शुरुआत के बाद से, तेल की कीमतें लगभग 120 डॉलर तक बढ़ गई हैं।
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कच्चा तेल 9% गिरकर 88 डॉलर पर: ट्रंप का ‘युद्ध ख़त्म’ बयान, एशियाई शेयर 6% तक बढ़े