पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया है कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के पहले दो दिनों में ही ईरान की सैन्य क्षमताएं लगभग पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं. ट्रंप के मुताबिक, ईरानी नौसेना, वायु सेना और विमान भेदी प्रणालियों को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
अमेरिका का दावा: ईरानी ढांचा ढहा
ट्रम्प ने ऑपरेशन को एक बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि ईरान का सैन्य नेतृत्व, दूरसंचार और रडार नेटवर्क अब अक्षम कर दिया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि ऑपरेशन जल्द ही खत्म हो जाएगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर अमेरिका और अधिक आक्रामक कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाएगा। ट्रंप के इस बयान से ऐसा लग रहा है कि युद्ध पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है.
आईआरजीसी की आश्चर्यजनक प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों को खारिज करते हुए ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कड़े शब्दों में पलटवार किया है। आईआरजीसी ने स्पष्ट किया है, “अमेरिका यह तय नहीं करेगा कि युद्ध कब ख़त्म होगा, लेकिन तेहरान करेगा।” ईरानी सेना ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र का भविष्य और युद्ध की गतिशीलता अब उनके हाथों में है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ख़तरा
इन सैन्य झड़पों का सबसे गंभीर प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है। ईरान ने सभी तेल टैंकरों के लिए यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बंद कर दिया है। खाड़ी देशों के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले और नाकेबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे विश्व अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा पैदा हो रहा है।