अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग अपने सबसे खतरनाक और निर्णायक दौर में पहुंचती नजर आ रही है. संघर्ष के नौवें दिन ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अब तक मिसाइल और हवाई हमलों तक सीमित रहा युद्ध अब ‘जमीनी युद्ध’ में बदल सकता है।
परमाणु भंडार की सुरक्षा का मुद्दा
अमेरिका और इजराइल के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता ईरान का परमाणु हथियार है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास बड़ी मात्रा में समृद्ध यूरेनियम है, जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है। इस खतरे को बेअसर करने के लिए अमेरिका और इजराइल अपने विशेष बलों के जरिए परमाणु केंद्रों पर सीधा नियंत्रण लेने की योजना बना रहे हैं.
डोनाल्ड ट्रंप की ओर इशारा
हाल ही में एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ज़मीनी अभियानों पर सीधा जवाब देने से परहेज किया, लेकिन ‘परमाणु सामग्री की सुरक्षा’ को सर्वोपरि बताया। उन्होंने संकेत दिया कि अगर स्थिति बिगड़ती है तो अमेरिका अपने विशेष बलों का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकेगा. ट्रंप के बयान ने पश्चिम एशिया में युद्ध की आग को और भड़का दिया है.
ईरान की आक्रामक प्रतिक्रिया
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के इस कदम के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है. उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर एक भी अमेरिकी या इजरायली सैनिक ने ईरान की धरती पर कदम रखा तो गंभीर परिणाम होंगे. अराघची ने दावा किया कि ईरानी सेना किसी भी विदेशी आक्रमण का सामना करने के लिए तैयार है और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक लड़ेगी।