ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रही तनातनी का आठवां दिन पूरा हो गया है. इस दौरान दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर भारी हमले किये हैं. बताया जाता है कि लगभग 8 दिनों में 8,000 से अधिक हमले हुए। इनमें हवाई हमले, मिसाइल हमले और ड्रोन हमले शामिल हैं।
लगभग 4,500 हवाई हमले
अमेरिका और इजराइल ने मिलकर करीब 4,500 हवाई हमले किए हैं. इन हमलों में फाइटर जेट, क्रूज़ मिसाइल, सटीक-निर्देशित बम और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया है। उनका मुख्य लक्ष्य ईरान के सैन्य शिविर, मिसाइल लॉन्चिंग साइट, वायु रक्षा प्रणाली और कमांड सेंटर रहे हैं। इन हमलों का मकसद ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है।
ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी
उधर, ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने करीब 3,500 मिसाइलों, ड्रोन और रॉकेट का इस्तेमाल किया है। इसमें 905 बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं। बैलिस्टिक मिसाइलें लंबी दूरी तय कर सकती हैं और भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखती हैं। ईरान का लक्ष्य अमेरिका और इजराइल पर दबाव बढ़ाना और उनकी रक्षा प्रणालियों को चुनौती देना है।
यह संघर्ष मुख्य रूप से लंबी दूरी के हमले हैं
इस युद्ध की सबसे खास बात यह है कि यह संघर्ष मुख्य रूप से लंबी दूरी के हमलों पर आधारित है। ज़मीन पर सीधी लड़ाई कम है, लेकिन आसमान में मिसाइलों और ड्रोनों का युद्ध छिड़ा हुआ है। जो देश अधिक मिसाइलों को रोक सकता है उसे रणनीतिक लाभ हो सकता है।
इजराइल के पास कितनी सेना है?
इज़राइल के पास इज़राइल रक्षा बलों द्वारा संचालित एक मजबूत वायु रक्षा प्रणाली है। इसमें आयरन डोम, डेविड स्लिंग और एरो मिसाइल सिस्टम जैसे सिस्टम शामिल हैं। अमेरिका की ओर से पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, THAAD और एजिस कॉम्बैट सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
खोरदाद 15 और मुख्यालय-9 जैसी हवाई सुरक्षा
दूसरी ओर, ईरान के पास बावर-373, खोरदाद 15 और एचक्यू-9 जैसी वायु रक्षा प्रणालियाँ हैं, जो उसकी सुरक्षा को मजबूत करती हैं। मौजूदा हालात को देखकर ऐसा लगता है कि इस युद्ध में सीधे तौर पर जीत या हार तय करना आसान नहीं है. अमेरिका और इजराइल प्रौद्योगिकी और वायु शक्ति में मजबूत हैं, जबकि ईरान मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं में तेजी से प्रतिक्रिया दे रहा है। आठ दिनों में हुए हजारों हमलों से पता चलता है कि यह संघर्ष न केवल सैन्य है, बल्कि रणनीति और प्रौद्योगिकी की भी बड़ी परीक्षा है। वायु रक्षा और मिसाइल क्षमताएं आने वाले दिनों में इस युद्ध की दिशा तय करेंगी।
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