मध्य पूर्व के कई देशों में चल रही तनावपूर्ण और अनिश्चित स्थिति को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 10 और कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। बोर्ड द्वारा 5 मार्च 2026 को जारी परिपत्र के अनुसार, कुछ देशों में आयोजित होने वाली परीक्षाओं के कार्यक्रम में बदलाव किया गया है।
कक्षा 10 की सभी निर्धारित परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं
सीबीएसई ने साफ कर दिया है कि 7 मार्च से 11 मार्च 2026 के बीच होने वाली 10वीं की सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं. इसके साथ ही 2 मार्च, 5 मार्च और 6 मार्च की परीक्षाएं जो पहले स्थगित कर दी गई थीं, उन्हें भी अब रद्द कर दिया गया है. यह फैसला खासतौर पर मध्य पूर्व के देशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
फैसला किन देशों में लागू होगा?
- सीबीएसई द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार परिवर्तन निम्नलिखित देशों में लागू होगा:
- बहरीन
- ईरान
- कुवैट
- ओमान
- कतार
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)
- इन देशों में मौजूदा हालात के कारण छात्रों के लिए परीक्षा केंद्र तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। इसलिए बोर्ड ने यह कदम उठाया है.
10वीं कक्षा के परिणाम के बारे में क्या?
सीबीएसई ने कहा है कि 10वीं कक्षा की परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों का रिजल्ट कैसे घोषित किया जाएगा इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है. इस संबंध में बोर्ड जल्द ही एक अलग अधिसूचना जारी करेगा। ऐसी संभावना है कि बोर्ड आंतरिक मूल्यांकन या अन्य विकल्पों के आधार पर परिणाम घोषित करने की विधि पर निर्णय ले सकता है, लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
12वीं कक्षा की परीक्षा स्थगित
सीबीएसई ने 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए भी एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। बोर्ड ने कहा है कि 7 मार्च, 2026 को होने वाली 12वीं कक्षा की परीक्षा को अभी के लिए पर्याप्त रूप से स्थगित कर दिया गया है। इस परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी। बोर्ड ने यह भी कहा है कि 7 मार्च को स्थिति की फिर से समीक्षा की जाएगी. 9 मार्च से शुरू होने वाली परीक्षाओं के संबंध में आगे के दिशानिर्देशों की घोषणा की जाएगी.
छात्रों को सीबीएसई की सलाह
सीबीएसई ने सभी छात्रों को अपने स्कूलों के संपर्क में रहने की सलाह दी है। बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक घोषणाओं और नोटिफिकेशन पर भी नजर रखें। बोर्ड के मुताबिक छात्रों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोपरि है. इसलिए मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. इस फैसले से मध्य पूर्व देशों में पढ़ने वाले हजारों भारतीय छात्रों और उनके अभिभावकों को अहम राहत मिल सकती है.