दुनिया में चल रहे संघर्षों में ड्रोन तकनीक बेहद अहम हो गई है. फिलहाल ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई तकनीक चर्चा का विषय बनी हुई है। अमेरिका ने युद्ध में “लुकास” नामक कम लागत वाले ड्रोन का उपयोग शुरू कर दिया है और दिलचस्प बात यह है कि इसकी तकनीक ईरान के “शहीद” ड्रोन से प्रेरित मानी जाती है।
सस्ते लेकिन प्रभावी आत्मघाती ड्रोन
ईरान कई वर्षों से सस्ते लेकिन प्रभावी आत्मघाती ड्रोन विकसित कर रहा है। विशेष रूप से, शहीद-131 और शहीद-136 ड्रोन लंबी दूरी तक उड़ान भरने और सीधे लक्ष्य पर विस्फोट करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ये ड्रोन घंटों तक लक्ष्य क्षेत्र के आसपास मंडरा सकते हैं और सही समय पर हमला कर सकते हैं।
शहीद ड्रोन की विशेषताएं
ईरान के शहीद ड्रोन को “आवारा गोला-बारूद” के रूप में जाना जाता है। यानी ये ड्रोन काफी देर तक हवा में मंडराने के बाद सीधे लक्ष्य पर हमला करते हैं.
प्रमुख विशेषताऐं
- लंबाई: लगभग 3.5 मीटर
- विस्फोटक क्षमता: लगभग 40-50 किग्रा
- गति: लगभग 115 मील प्रति घंटे
- रेंज: 1000 मील से अधिक
इन ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल पहली बार 2019 में सऊदी अरब में एक तेल रिफाइनरी पर हमले के दौरान देखा गया था। बाद में इसका इस्तेमाल यमन में हौथी विद्रोहियों और रूस-यूक्रेन युद्ध में किया गया।
रूस-यूक्रेन युद्ध से सबक
रूस ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में बड़ी संख्या में ईरानी ड्रोन का इस्तेमाल किया था। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने ईरान पर रूस को प्रौद्योगिकी और ड्रोन की आपूर्ति करने का आरोप लगाया। इस युद्ध में शहीद ड्रोन की प्रभावशीलता को देखते हुए अमेरिका ने भी इस तकनीक का विश्लेषण करना शुरू कर दिया। अमेरिकी सेना ने कई शहीद ड्रोन हासिल किए, उनका तकनीकी परीक्षण किया और फिर अपनी नई प्रणाली विकसित करने के लिए उन्हें रिवर्स-इंजीनियर किया।
लुकास ड्रोन क्या है?
अमेरिका द्वारा विकसित “लुकास” (लो-कॉस्ट अनक्रूड कॉम्बैट अटैक सिस्टम) एक सस्ता लेकिन आधुनिक हमलावर ड्रोन है। यूएस सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इस ड्रोन का इस्तेमाल हाल ही में हुए किसी युद्ध में पहली बार किया गया है।
लुकास ड्रोन की विशेषताएं:
- अनुमानित कीमत: लगभग 35,000 डॉलर
- समुद्र से भी लॉन्च करने की क्षमता
- उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरा प्रणाली
- सैटेलाइट कनेक्टिविटी
- उड़ान के दौरान लक्ष्य बदलने की क्षमता
यदि इन ड्रोनों को बड़ी संख्या में लॉन्च किया जाता है, तो वे दुश्मन के रडार और वायु रक्षा प्रणालियों को भ्रमित कर सकते हैं। तब महंगी मिसाइलों या बमों से प्रमुख लक्ष्यों पर हमला करना आसान हो सकता है।
“ड्रोन प्रभुत्व” रणनीति
अमेरिका अब “ड्रोन डोमिनेंस स्ट्रैटेजी” अपना रहा है। इसके तहत 2028 तक करीब 3.4 लाख सस्ते अटैक ड्रोन बनाने की योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य महंगे फाइटर जेट या मिसाइलों पर निर्भरता कम करना और बड़ी संख्या में सस्ते ड्रोन से दुश्मन की हवाई सुरक्षा को नष्ट करना है।
आधुनिक युद्ध का बदलता गणित
विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध अब “त्वरित और महंगे हथियारों” से “सस्ते और व्यापक रूप से उपलब्ध हथियारों” में बदल रहा है। एआई-आधारित ड्रोन झुंड तकनीक को भविष्य में और विकसित किया जा सकता है, जिसमें कई ड्रोन एक साथ समन्वित हमला कर सकते हैं। यही कारण है कि दुनिया भर के देश अब ड्रोन तकनीक में भारी निवेश कर रहे हैं, क्योंकि आने वाले युद्धों में यह तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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