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प्रधानमंत्री मोदी और कनाडाई पीएम मार्क कार्नी के बीच सोमवार सुबह हैदराबाद हाउस में मुलाकात हुई। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा- भारत और कनाडा ने निवेश-व्यापार समझौते पर चर्चा की है. सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में, हमने यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये हैं. इससे दोनों देशों में रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, हम छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकी के विकास पर सहयोग करेंगे। हमारे लक्ष्यों में कृषि, कृषि प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा में मूल्यवर्धन भी शामिल है। पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध को लेकर पीएम ने कहा- भारत पश्चिम एशिया में तनाव को लेकर चिंतित है. भारत दुनिया में शांति और स्थिरता चाहता है. हर समस्या का समाधान संवाद से होना चाहिए। पीएम ने आगे कहा- हम इस बात से सहमत हैं कि आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरवाद न केवल हमारे दोनों देशों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौतियां हैं। इन खतरों का मुकाबला करने में हमारा घनिष्ठ सहयोग वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए आवश्यक है। विभिन्न मौजूदा मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट है। भारत में भारत-कनाडा पल्स प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास और परिपक्व रिश्ते का प्रतीक है। हम रक्षा उद्योगों, समुद्री क्षेत्र जागरूकता और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए काम करेंगे। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हमने आज भारत-कनाडा रक्षा संवाद स्थापित करने का निर्णय लिया है। 10 साल का यूरेनियम आपूर्ति समझौता पीएम कार्नी की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और कनाडा के बीच 10 साल का यूरेनियम आपूर्ति समझौता है। यह डील करीब 3 अरब डॉलर की बताई जा रही है। कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक है। भारत और कनाडा के बीच परमाणु सहयोग समझौता 2013 में लागू हुआ, जिसके बाद कनाडा ने भारत को यूरेनियम की आपूर्ति शुरू कर दी। भारत अपने तेजी से बढ़ते परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए अधिक यूरेनियम खरीदना चाहता है। पीएम कार्नी की भारत यात्रा से जुड़ी 4 तस्वीरें… भारत में निवेश को बढ़ावा दे रहा कनाडा भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। कनाडा सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 21 अरब डॉलर से ज्यादा का है। भारत में 600 से अधिक कनाडाई कंपनियाँ काम कर रही हैं। भारत से कनाडा को होने वाले प्रमुख निर्यातों में दवाएं, आभूषण और समुद्री उत्पाद शामिल हैं। कनाडा के बड़े पेंशन फंड पहले ही भारत में रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने भारत में 100 अरब डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) का निवेश किया है। अब कनाडा इस निवेश को और बढ़ाना चाहता है. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का कहना है कि दोनों देशों के बीच कई बार राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए कनाडा एक विश्वसनीय भागीदार बना रहेगा। निज्जर की हत्या के बाद बिगड़े रिश्ते 2023 में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के रिश्ते खराब हो गए. कनाडा ने भारत पर निज्जर की हत्या का आरोप लगाया. कनाडा के तत्कालीन प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद को बताया कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों को सबूत मिले हैं कि हत्या में भारत सरकार के एजेंट शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इसे कनाडा की संप्रभुता पर हमला बताया. भारत ने इन आरोपों का जोरदार खंडन किया. भारत ने कहा कि कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथी और आतंकवादी खुलेआम सक्रिय हैं, जो भारत के खिलाफ गतिविधियां चलाते हैं और कनाडा उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है. इसके बाद दोनों देशों ने एक दूसरे के कई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया. भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए वीज़ा सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। कनाडा ने भी भारत के साथ व्यापार मिशन रद्द कर दिए और दोनों के लिए यात्रा सलाह जारी की गई। बातचीत लगभग बंद हो गई और सीईपीए जैसी महत्वपूर्ण चर्चाएं रुक गईं। जस्टिन ट्रूडो के पद छोड़ने और मार्क कार्नी के प्रधान मंत्री बनने (मार्च 2025) के बाद, दोनों देशों ने संबंधों को सुधारने का प्रयास किया। कनाडा में हर चौथा व्यक्ति विदेशी मूल का है। कनाडा दुनिया के उन देशों में से एक है जहां पर्यटकों (प्रवासियों) की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2021 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार, कनाडा में लगभग 83.6 लाख (8.3 मिलियन) लोग विदेश में जन्मे हैं, जो देश की कुल आबादी का लगभग 23% है। यह आंकड़ा स्टैटिस्टिक्स कनाडा द्वारा जारी किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यटकों ने कनाडा की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन हाल के वर्षों में इस मुद्दे पर बहस भी तेज हो गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, कनाडा में भारतीय मूल के लगभग 16 लाख लोग रहते हैं। जबकि करीब 3 लाख (करीब 3.03 लाख) लोग पाकिस्तानी मूल के हैं।
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भारत को यूरेनियम सप्लाई करेगा कनाडा: पीएम मोदी और कार्नी की मुलाकात के बाद समझौते पर हस्ताक्षर, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग करेंगे दोनों देश