मध्य पूर्व में छिड़ा युद्ध अब भयावह मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के अंदर 2000 से ज्यादा रणनीतिक ठिकानों पर हमला किया है. इस क्रूर ऑपरेशन में कथित तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए थे। इस हमले के जवाब में ईरान ने सऊदी अरब, दुबई और कुवैत जैसे देशों पर जवाबी कार्रवाई की है, लेकिन अमेरिका ने ईरान को घुटनों पर लाने के लिए अपनी पूरी सैन्य ताकत लगा दी है.
अमेरिका के घातक हथियारों की सूची
यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू किया गया है। इस ऑपरेशन में प्रयुक्त हथियारों की सूची निम्नलिखित है:
वायु शक्ति: बी-2 स्टील्थ बॉम्बर, एफ-35 स्टील्थ फाइटर, एफ-22, एफ-18 और ए-10 अटैक जेट का इस्तेमाल किया गया है।
ड्रोन प्रौद्योगिकी: लुकास ड्रोन और एमक्यू-9 रीपर द्वारा ईरानी लक्ष्यों पर सटीक बमबारी।
रक्षा प्रणाली: ईरानी मिसाइलों को रोकने के लिए पैट्रियट इंटरसेप्टर और THAAD एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली तैनात की गई है।
नौसेना: परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमान वाहक और निर्देशित मिसाइल विध्वंसक समुद्र से हमला करते हैं।
लॉजिस्टिक्स: सी-17 ग्लोबमास्टर और सी-130 कार्गो विमान लगातार सप्लाई पहुंचा रहे हैं।
कौन से लक्ष्य पर हमला किया गया?
अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए कई स्थानों को निशाना बनाया है:
आईआरजीसी मुख्यालय: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमान और नियंत्रण केंद्र।
मिसाइल साइटें: बैलिस्टिक और जहाज-रोधी मिसाइल प्रक्षेपण साइटें।
नौसेना: ईरानी जहाजों और पनडुब्बियों को समुद्र में निष्क्रिय कर दिया गया है।
संचार: सैन्य संचार और वायु रक्षा प्रणालियाँ जाम हो गई हैं।