ईरान इज़राइल युद्ध: सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत, कौन थे खामेनेई और क्यों थे अमेरिका के लिए सबसे बड़े खलनायक?

Neha Gupta
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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, जिनका नाम दशकों तक पश्चिम एशियाई राजनीति पर हावी रहा, की मौत की रिपोर्ट ने दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य अभियान के बाद ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए ने इस खबर की पुष्टि की। यह घटना सिर्फ एक नेता का अंत नहीं है, बल्कि एक पूरे युग का अंत है।

ट्रंप-नेतन्याहू का दावा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान में हुए भीषण विस्फोटों का मुख्य मकसद ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाना था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस ऑपरेशन की सफलता का दावा किया है और कहा है कि ‘अब ईरान आजाद होगा.’ ट्रंप ने आने वाले बड़े विद्रोह का संकेत देते हुए खुलेआम ईरान के नागरिकों से उनकी सरकार को उखाड़ फेंकने की अपील की है।

86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई कौन थे?

खामेनेई न केवल एक राजनीतिक नेता थे, बल्कि ईरान के आध्यात्मिक और न्यायिक प्रमुख भी थे। उन्होंने 1979 की इस्लामी क्रांति के नेता रूहुल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद 1989 में सत्ता संभाली। 35 वर्षों से अधिक समय तक उनका ईरान की सेना, न्यायपालिका और सरकार पर पूर्ण नियंत्रण था। उनके एक इशारे से ईरान की विदेश नीति निर्धारित होती थी।

अमेरिका और इजराइल से कड़ी प्रतिद्वंद्विता

खामेनेई पश्चिम, विशेषकर अमेरिका को ईरान का ‘नंबर एक दुश्मन’ मानते थे। उनकी आक्रामक नीतियों के पीछे एक मुख्य कारण यह है कि अमेरिका ईरान पर गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित करने का आरोप लगाता रहता है। खामेनेई के तहत, ईरान ने अपनी परमाणु संवर्धन प्रक्रिया को तेज कर दिया, जिससे इज़राइल के लिए अस्तित्व का खतरा पैदा हो गया। खामेनेई ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को बेहद शक्तिशाली बना दिया। ये ताकतें सीधे उन्हें रिपोर्ट करती थीं और मध्य पूर्व में अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए जानी जाती थीं। वह ईरान में पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव के सख्त विरोधी थे और सख्त इस्लामी कानूनों पर जोर देते थे।

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