कनाडा: पीएम कार्नी आज से भारत दौरे पर, कड़वाहट भुलाकर सुधारेंगे दोनों देशों के रिश्ते, जानें भारत को क्या होगा फायदा?

Neha Gupta
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भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और मजबूत अर्थव्यवस्था को देखकर पश्चिमी देश अब भारत के साथ रिश्ते सुधारने के लिए उत्सुक हैं। यूरोपीय संघ, ब्राजील और फ्रांस के साथ सफल राजनयिक वार्ता के बाद, कनाडाई प्रधान मंत्री मार्क कार्नी आज भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर निकल रहे हैं। 27 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक चलने वाली यह यात्रा दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को सामान्य बनाने और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

यात्रा का मुख्य एजेंडा और एफटीए

पीएम कार्नी की यात्रा का सबसे अहम पहलू मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ता है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पहले संकेत दिया था कि सोमवार से इस पर औपचारिक रूप से चर्चा शुरू हो सकती है. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के कारण पैदा हुई आर्थिक अनिश्चितता के बीच कनाडा अब भारत में अपने लिए एक बड़ा बाजार तलाश रहा है।

मुंबई में बिजनेस समिट और निवेश

पीएम कार्नी अपनी यात्रा की शुरुआत मुंबई से करेंगे, जहां वह भारतीय और कनाडाई सीईओ और वित्तीय विशेषज्ञों से मुलाकात करेंगे। विशेष रूप से कनाडाई पेंशन फंड भारतीय बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप में भारी निवेश करने के इच्छुक हैं।

भारत को प्रमुख लाभ:

ऊर्जा सुरक्षा: परमाणु ऊर्जा के लिए यूरेनियम और भारी कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए भारत कनाडा के साथ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकता है।

प्रौद्योगिकी और एआई: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच अनुसंधान और नवाचार के लिए नए दरवाजे खुलेंगे।

महत्वपूर्ण खनिज: इलेक्ट्रिक वाहनों और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए आवश्यक ‘महत्वपूर्ण खनिजों’ के लिए कनाडा भारत का रणनीतिक भागीदार बन सकता है।

कूटनीतिक रीसेट: कनाडा ने पुरानी कड़वाहट को कम करते हुए हाल ही में स्वीकार किया कि भारत हिंसक अपराधों में शामिल नहीं है। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच विश्वास का माहौल बहाल होगा.

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नए भू-राजनीतिक समीकरण बनेंगे

2 मार्च को हैदराबाद हाउस में प्रधान मंत्री मोदी और मार्क कार्नी के बीच उच्च स्तरीय बैठक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नए भू-राजनीतिक समीकरण बनाएगी। इस यात्रा से न केवल व्यापार बल्कि कृषि, शिक्षा और वैश्विक सुरक्षा के मुद्दों पर भी भारत की स्थिति मजबूत होगी।

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