नासा ने माना कि सुनीता की अंतरिक्ष उड़ान जोखिम भरी थी: इसे कल्पना चावला के साथ हुई दुर्घटना की तरह माना गया; घटना को गंभीर श्रेणी में रखा गया था

Neha Gupta
5 Min Read


अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने माना कि सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष में फंसना खतरनाक था। नासा ने मिशन को टाइप ए आपदा के रूप में वर्गीकृत किया है। यह श्रेणी त्रासदी की सबसे गंभीर श्रेणी मानी जाती है। चैलेंजर और कोलंबिया शटल आपदाओं के लिए इसी श्रेणी का उपयोग किया गया था। भारतीय अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की कोलंबिया शटल दुर्घटना में मृत्यु हो गई। 19 फरवरी, 2026 को जारी 311 पन्नों की रिपोर्ट में नासा प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने लिखा- सुनीता विलियम्स का मिशन गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण था। उन्होंने कमियों को नजरअंदाज करने के लिए एजेंसी और बोइंग की कड़ी आलोचना की. दरअसल, सुनीता विलियम्स साल 2024 में 8 दिन के मिशन पर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पहुंची थीं, लेकिन तकनीकी कारणों से उनकी वापसी में 9 महीने से ज्यादा का वक्त लग गया। जनवरी में 27 साल बाद रिटायर हुईं सुनीता विलियम्स नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 27 साल बाद रिटायर हो गई हैं। उनकी सेवानिवृत्ति 27 दिसंबर 2025 से प्रभावी हुई। हालांकि, नासा ने 20 जनवरी को इसकी घोषणा की। सुनीता 27 साल पहले 1998 में नासा में शामिल हुईं। उन्होंने नासा के 3 मिशनों में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 608 दिन बिताए। वह 9 दिसंबर 2006 को पहली बार अंतरिक्ष में गए थे। सुनीता ने अंतरिक्ष में 9 बार स्पेसवॉक किया था। इस दौरान उन्होंने 62 घंटे और 6 मिनट तक अंतरिक्ष में चहलकदमी की। यह किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री की सबसे अधिक उपलब्धि है। सुनीता ने कहा- अंतरिक्ष से धरती को देखने पर ऐसा लगता है कि हम सब एक हैं। सुनीता ने पिछले महीने भारत का दौरा किया था। उन्होंने दिल्ली में अमेरिकन सेंटर में ‘सितारों पर निगाहें, ज़मीन पर पैर’ सेमिनार में भी हिस्सा लिया। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्य लोकतांत्रिक तरीके से, सबके हित, सहयोग और पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए, ताकि किसी एक देश का वर्चस्व न हो और पूरी मानवता को लाभ हो। भारत आना घर वापसी जैसा है: भारत आना उनके लिए घर वापसी जैसा लगता है, क्योंकि उनके पिता गुजरात के मेहसाणा जिले के झुलसन गांव के रहने वाले थे। वहीं, जोकर से जब एनडीटीवी ने चांद पर जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, ‘मैं चांद पर जाना चाहती हूं, लेकिन मेरे पति मुझे जाने नहीं देंगे। अब घर लौटने और जिम्मेदारी सौंपने का समय आ गया है।’ अंतरिक्ष अन्वेषण में अगली पीढ़ी को अपनी जगह बनानी होगी। अंतरिक्ष में बिताए दिनों पर: क्या अंतरिक्ष यात्रा ने जीवन के प्रति उनके दृष्टिकोण को बदल दिया है, वे कहते हैं- हाँ, निश्चित रूप से। जब आप अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखते हैं, तो आपको एहसास होता है कि हम सभी एक हैं और हमें एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। अंतरिक्ष मलबे पर: यह पिछले एक दशक में एक बड़ी चुनौती बन गया है और इसे प्रबंधित करने के लिए नई प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता है। याद किए गए अंतरिक्ष मिशन: अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर बिताए गए समय और चुनौतीपूर्ण अवधि के बारे में बात की गई, जिसके दौरान 8-दिवसीय मिशन तकनीकी गड़बड़ियों के कारण नौ महीने से अधिक में बदल गया। इस बीच, आईएसएस पर त्योहार मनाते बहु-सांस्कृतिक दल के दृश्य भी दिखाए गए। अब जानिए कल्पना चावला के बारे में… भारतीय अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला ने पहली बार 19 नवंबर 1997 को अंतरिक्ष में उड़ान भरी थी। वह अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा में 372 घंटे तक अंतरिक्ष में रहीं। इसके बाद उन्हें 16 जनवरी 2003 को दूसरी बार अंतरिक्ष में जाने का मौका मिला। कल्पना चावला को 1 फरवरी 2003 को सुरक्षित पृथ्वी पर लौटना था, लेकिन उनका मिशन विफल रहा। चावला के अंतरिक्ष यान कोलंबिया शटल एसटीएस-107 के उड़ान भरने के दौरान, शटल के ईंधन टैंक से इंसुलेटिंग फोम के टुकड़े शटल के बाएं पंख से टकरा गए। इस वजह से जैसे ही कल्पना चावला का अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वायुमंडल में पहुंचा, हवा की तीव्र घर्षण गर्मी के कारण एक बड़ा विस्फोट हुआ और सभी 7 अंतरिक्ष यात्री मारे गए।

Source link

Share This Article