भारत और अमेरिका के बीच पिछले कई महीनों से व्यापार और टैरिफ को लेकर विवाद चल रहा है। अब तनाव ख़त्म हो गया है और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार 2 फरवरी को इस अहम समझौते की आधिकारिक घोषणा की.
टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया गया
इस समझौते के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर कुल टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ करीब 30 मिनट तक चली फोन पर बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया. इस कदम को भारत के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है.
भारत की ऊर्जा नीति में बदलाव
इस डील का सबसे अहम हिस्सा भारत की ऊर्जा नीति में बदलाव है. भारत अब रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है। इसके बजाय, भारत अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा। अमेरिका का मानना है कि इस फैसले से यूक्रेन में युद्ध के लिए रूस को मिलने वाली आर्थिक मदद रोकने में मदद मिलेगी.
अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर
इसके साथ ही भारत ने अगले कुछ वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर की ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि उत्पाद और कोयला खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई दिशा देगा. पीएम नरेंद्र मोदी ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों के लिए एक बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच यह सहयोग दोनों लोकतांत्रिक देशों के लिए विकास के नये द्वार खोलेगा.
इस समझौते को लेकर उम्मीद जताई
ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर ने भी समझौते को लेकर उम्मीद जताई. 12 जनवरी को पदभार संभालने के बाद उन्होंने कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत से समाधान संभव है. उन्होंने कहा कि ट्रंप और मोदी की दोस्ती सच्ची है और सच्चे दोस्तों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अंत में वे दूर हो जाते हैं।
- टाइमलाइन पर नजर डालें तो यह व्यापार विवाद पिछले साल अप्रैल में शुरू हुआ था.
- 2 अप्रैल 2025: अमेरिका ने भारतीय आयात पर 26% टैरिफ लगाया
- 10 अप्रैल 2025: टैरिफ 90 दिनों के लिए निलंबित, लेकिन 10% ड्यूटी जारी रही
- 31 जुलाई 2025: भारतीय वस्तुओं पर 25% टैरिफ और रूसी तेल पर चेतावनी
- 7 अगस्त 2025: टैरिफ 50% तक बढ़ाया गया
अब इस नए समझौते से दोनों देशों के बीच तनाव खत्म हो गया है और व्यापार संबंधों में एक नई शुरुआत हुई है.