अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं. व्हाइट हाउस में लौटने के बाद से ट्रंप लगातार ऐसे फैसले ले रहे हैं जिनका सीधा असर अमेरिका की ऐतिहासिक विरासत पर पड़ता है। ताजा फैसले के मुताबिक वॉशिंगटन के मशहूर ‘कैनेडी सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स’ को अगले जुलाई से दो साल के लिए पूरी तरह से बंद करने का ऐलान किया गया है. ट्रंप के मुताबिक यह फैसला केंद्र के ‘आधुनिकीकरण’ के लिए है, लेकिन आलोचक इसे कलाकारों के खिलाफ ‘बदला’ के तौर पर देख रहे हैं.
कलाकारों का विरोध और ट्रंप की जिद
सोशल मीडिया पर इस घोषणा के पीछे का संदर्भ बहुत गहरा है. ट्रंप ने पद संभालते ही कैनेडी सेंटर के पुराने नेतृत्व को हटाकर अपने खास लोगों को बोर्ड में बिठा दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने इमारत के साथ अपना नाम जोड़ने के लिए एक आंदोलन भी चलाया। इससे दुखी होकर कई मशहूर अमेरिकी कलाकारों और प्रदर्शन समूहों ने यहां अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिये. हालांकि ट्रंप ने अपने पोस्ट में विरोध का जिक्र नहीं किया, लेकिन सूत्रों का मानना है कि शो रद्द होने की वजह से ट्रंप ने यह कठोर कदम उठाया है.
मेलानिया की डॉक्यूमेंट्री और ‘ट्रम्प’ बोर्ड
यह घोषणा प्रथम महिला मेलानिया ट्रम्प पर एक विशेष वृत्तचित्र के प्रीमियर के बाद की गई है। ट्रम्प स्वयं इस केंद्र के न्यासी बोर्ड के अध्यक्ष हैं और उनके विशेष सहयोगी रिक ग्रेनेल वर्तमान में केंद्र के अध्यक्ष हैं। ट्रंप का कहना है कि विशेषज्ञों की राय के बाद इतना बड़ा फैसला लिया गया है. उनके अनुसार, कैनेडी सेंटर वर्तमान में ‘जर्जर और आर्थिक रूप से कमजोर’ है, जिसे विश्व स्तरीय मनोरंजन केंद्र बनाने के लिए इस सर्जरी की आवश्यकता है।
ऐतिहासिक इमारतों को बदलने की रणनीतियाँ
डोनाल्ड ट्रम्प कैनेडी सेंटर तक ही सीमित नहीं हैं। वे पूरे वाशिंगटन पर अपनी छाप छोड़ना चाहते हैं। ईस्ट विंग को तोड़कर 400 मिलियन डॉलर की लागत से एक भव्य बॉलरूम का निर्माण शुरू हो गया है।
उनकी लिंकन मेमोरियल के पास ‘विजय मेहराओ’ बनाने की महत्वाकांक्षी योजना है। वे डलेस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की संरचना में भी बड़े बदलाव करने जा रहे हैं।