इस घटना से अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या शी जिनपिंग को अंदर से किसी तरह का खतरा महसूस हो रहा है? दरअसल, पिछले कुछ महीनों में चीन ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि इसमें रक्षा मंत्रालय से जुड़े बड़े नाम और रॉकेट फोर्स के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। रॉकेट फोर्स को चीन की परमाणु और मिसाइल शक्ति की रीढ़ माना जाता है, इसलिए वहां चल रही जांच बेहद संवेदनशील मानी जाती है।
जानकारों के मुताबिक यह सिर्फ भ्रष्टाचार का मामला नहीं है
जानकारों के मुताबिक यह सिर्फ भ्रष्टाचार का मामला नहीं है बल्कि इसके पीछे सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति भी हो सकती है. शी जिनपिंग लंबे समय से सेना पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। चीन में सेना को सत्ता का मजबूत आधार माना जाता है और इतिहास गवाह है कि किसी भी नेता की स्थिरता के लिए सैन्य समर्थन महत्वपूर्ण है।
शी जिनपिंग संभावित असंतोष या गुटबाजी को पहले से ही दबाना चाहते हैं
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि शी जिनपिंग संभावित असंतोष या गुटबाजी को पहले से ही दबाना चाहते हैं। इससे उन जनरलों को निशाना बनाया जा रहा है जिनकी निष्ठा पर सवाल उठाया जा सकता है या जिनका प्रभाव बहुत अधिक बढ़ गया है। हालाँकि, चीनी सरकार ने किसी भी सुरक्षा खतरे या तख्तापलट की धमकी से साफ इनकार किया है।
शी जिनपिंग का ये कदम उन्हें और ताकतवर बनाता है
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग का यह कदम उन्हें और अधिक शक्तिशाली बनाता है, लेकिन इससे सेना के भीतर भय और असंतोष भी बढ़ सकता है। यह स्पष्ट नहीं है कि जांच कितनी आगे तक जाएगी, लेकिन यह तय है कि इस मामले का चीन के राजनीतिक और सैन्य बुनियादी ढांचे पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई है या फिर शी जिनपिंग किसी बड़े खतरे को भांपने की कोशिश कर रहे हैं.
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