‘बसिज’ एक ईरानी अर्धसैनिक समूह है। जिसकी स्थापना 1979 में हुई थी। इसका मिशन ईरान में इस्लामिक शासन को कायम रखना है।
‘बसिज’ नाम से फैला डर
ईरान की सड़कों पर अशांति को नियंत्रित करने के लिए, अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार ने ‘बासीज’ नामक एक अर्धसैनिक समूह को तैनात किया है। मानवाधिकार आयोग के मुताबिक, यह ग्रुप अब तक ईरान में 500 दंगाइयों को मार चुका है। इसे ईरान का सबसे खूंखार उग्रवादी समूह माना जाता है। यह सरकार के विरुद्ध आंतरिक विद्रोह को रोकने के लिए गठित एक स्वयंसेवी संगठन है।
‘बसिज’ का क्या अर्थ है?
‘बसिज’ एक फ़ारसी शब्द है जिसका अर्थ है “गतिशीलता”। इसका गठन 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद किया गया था। उस समय इस्लामिक क्रांति के नेता अली खुमैनी का मानना था कि यह संगठन अमेरिका से ईरान की हमेशा रक्षा करेगा। ‘बसिज’ में केवल ग्रामीण इस्लामी रूढ़िवादी पृष्ठभूमि के लोग शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर यह संगठन मस्जिदों के ज़रिए लोगों पर नियंत्रण रखता है. यह संगठन काफी हद तक ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा नियंत्रित है। इस संगठन में करीब 2 करोड़ सैनिक हैं. जिनकी उम्र 18 से 50 साल के बीच है.
ईरान में अशांति और उसके विरुद्ध कार्रवाई
27 दिसंबर 2025 से ही ईरान में महंगाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. ये विरोध प्रदर्शन सरकार के खिलाफ हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की मांगें जायज हैं, लेकिन कुछ दंगाइयों ने पूरे प्रदर्शन को हाईजैक कर लिया। ईरान में विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए 500 से अधिक नागरिकों की हत्या कर दी गई है। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शन के समर्थन में बयान जारी किया. ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान में अत्याचार जारी रहा तो हम सेना भेज सकते हैं.
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