अमेरिका के खिलाफ ईरान का आक्रामक रुख, एहतियाती हमले की चेतावनी, जानिए क्या है मामला?

Neha Gupta
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पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है. ईरान में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं, अमेरिका और इज़रायल खुलकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर रहे हैं। यह ईरानी सरकार की आंतरिक सुरक्षा और शक्ति के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

इस बयान के बाद ईरान आक्रामक हो गया है

अमेरिका ने हाल ही में कहा था कि अगर ईरानी सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करती है, तो अमेरिका उनकी सहायता के लिए आएगा। इस बयान के बाद ईरान और अधिक आक्रामक हो गया है. ईरान के सेना प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातमी ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका से कोई खतरा पैदा हुआ तो ईरान सिर्फ शब्दों से नहीं बल्कि सैन्य कार्रवाई से जवाब देगा.

“पूर्व-खाली हड़ताल”

7 जनवरी को जारी एक चेतावनी में, अमीर हतामी ने “पूर्व-खाली हड़ताल” की बात कही। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दी गई धमकियों का सीधा जवाब दिया और कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए कोई भी कदम उठाने से नहीं हिचकेगा.

प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक क्या है?

प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक का मतलब है कि कोई देश हमला होने से पहले अपनी रक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई करता है। इस प्रकार के हमलों का उद्देश्य किसी संभावित खतरे को उसकी शुरुआत में ही ख़त्म करना है। इसे अंतरराष्ट्रीय कानून में आत्मरक्षा के अधिकार के रूप में भी देखा जाता है, हालांकि यह विषय विवादास्पद है।

विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

यदि ईरान वास्तव में कोई पूर्वव्यापी हमला करता है, तो इसका सबसे बड़ा प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ सकता है। यह मार्ग दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया का बड़ी मात्रा में तेल यहीं से होकर गुजरता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है और तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। यह स्थिति सिर्फ अमेरिका और ईरान तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए इस संघर्ष पर वैश्विक स्तर पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

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