विरोध प्रदर्शन अब आर्थिक मांगों से आगे बढ़कर शासन परिवर्तन की मांग तक पहुंच गया है।
सत्ता परिवर्तन की मांग
ईरान में हालात बिगड़ते जा रहे हैं. देश गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है और इसका सीधा असर सड़कों पर दिख रहा है. ईरान के कई शहरों में तीन दिनों से हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहा है. बढ़ती महँगाई, बेरोज़गारी और मुद्रा के तेज़ अवमूल्यन से जनता का गुस्सा भड़क रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि शुरू में जो विरोध प्रदर्शन आर्थिक मांगों तक सीमित थे, वे अब सीधे सत्ता परिवर्तन की मांगों पर केंद्रित हो रहे हैं।
स्थिति क्यों बदली?
पहले ऐसे विरोध प्रदर्शन महंगाई या रोज़गार जैसे मुद्दों तक ही सीमित रहते थे लेकिन इस बार हालात अलग थे. कुछ ही दिनों में यह आंदोलन तेहरान से इस्फ़हान, शिराज, यज़्द और करमानशाह जैसे प्रमुख शहरों तक फैल गया। जब विश्वविद्यालय के छात्र दुकानदारों के साथ शामिल हो गए तो आंदोलन पूरी तरह से राजनीतिक हो गया। लोग “तानाशाह मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाने लगे। इसके साथ ही ‘नो गाजा, नो लेबनान, माई लाइफ ओनली फॉर ईरान’ जैसे नारे भी सुनाई दिए।
युद्ध से स्थिति और भी खराब हो गई
आर्थिक कुप्रबंधन ही इस संकट का एकमात्र कारण नहीं है। पिछले साल जून में इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ ईरान के 12 दिवसीय युद्ध ने स्थिति खराब कर दी थी। युद्ध में 1,000 से अधिक लोग मारे गए और ईरान के कई परमाणु स्थलों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। इसके बाद, संयुक्त राष्ट्र ने उन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को फिर से लागू कर दिया, जिन्हें लगभग दस साल पहले हटा दिया गया था। इन प्रतिबंधों से ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा है.