तुर्की ने पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के साथ अपनी सक्रिय भागीदारी कम कर दी।
बातचीत में नया विवाद
तुर्की और कतर की मध्यस्थता में चल रही पाकिस्तान-अफगानिस्तान शांति वार्ता में एक नया विवाद सामने आया है। विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि तुर्की की खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से कड़ी नाराजगी जताई है. इसकी वजह अंकारा में बातचीत के दौरान पाकिस्तानी सैन्य प्रतिनिधिमंडल का व्यवहार है. टीम का चयन पूरी तरह से जनरल मुनीर के विवेक पर किया गया था।
पाकिस्तानी सेना का नेतृत्व
पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने बातचीत के दौरान अनुचित मांगें कीं, अक्सर मध्यस्थों की अनदेखी की और राजनयिक शिष्टाचार का अनादर किया। ऐसा कहा जाता है कि इस व्यवहार ने पूरी प्रक्रिया को कमजोर कर दिया है, जिससे तुर्की के प्रयासों में बाधा उत्पन्न हुई है। तुर्की की राष्ट्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी के प्रमुख ने इस व्यवहार को सीधे तौर पर अपमान बताया. सूत्र बताते हैं कि उन्होंने पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व को स्पष्ट कर दिया है कि आपसी सम्मान के बिना सहयोग संभव नहीं होगा।
अंकारा में मध्यस्थ की भूमिका
पाकिस्तान लंबे समय से तुर्की को एक रणनीतिक साझेदार मानता रहा है। इस साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच संक्षिप्त संघर्ष के दौरान तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया था। अंकारा ने अफगानिस्तान में अक्सर मध्यस्थ की भूमिका भी निभाई है। लेकिन इस घटना ने तुर्की-पाकिस्तानी सैन्य समन्वय में खटास, अफगान मुद्दे पर विश्वास की कमी और क्षेत्रीय कूटनीति में नई अनिश्चितताओं के बारे में सवाल खड़े कर दिए हैं।