ईरान में एक बार फिर आर्थिक और सामाजिक अशांति भड़क उठी है। देश की मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। जैसे ही रियाल गिरकर लगभग 14.2 लाख प्रति डॉलर पर आ गया, बाजार घबरा गए और लोग सड़कों पर उतर आए।
प्रमुख शहरों में प्रदर्शन
राजधानी तेहरान समेत इस्फ़हान, शिराज और मशहद जैसे प्रमुख शहरों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। व्यापारियों और दुकानदारों ने ख़ासकर सादी स्ट्रीट और ग्रैंड बाज़ार के आसपास अपनी दुकानें बंद रखकर विरोध प्रदर्शन किया है. वहां की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के केंद्रीय बैंक के प्रमुख मोहम्मद रज़ा फ़ारज़िन ने बढ़ते दबाव के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, कई व्यापारियों ने दूसरों से भी काम बंद करने का आह्वान किया है। इसे सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इस विरोध प्रदर्शन को पिछले तीन साल के सबसे बड़े जन आंदोलन के तौर पर देखा जा रहा है.
प्रदर्शनी में कई जगहों पर तनाव
प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। लोगों का गुस्सा खासतौर पर महंगाई और जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में मुद्रास्फीति 42 प्रतिशत से अधिक थी, जबकि खाद्य पदार्थों की कीमतें लगभग 70 प्रतिशत बढ़ीं।
आर्थिक स्थिति ख़राब है
ईरान की आर्थिक स्थिति के पीछे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध भी एक बड़ा कारण है। 2015 के परमाणु समझौते के बाद रियाल स्थिर हो गया, लेकिन 2018 में अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने के बाद आर्थिक दबाव बढ़ता रहा। हाल के क्षेत्रीय तनाव और नए प्रतिबंधों ने स्थिति को और खराब कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो ईरान में आर्थिक असंतोष गहरा सकता है और सरकार के लिए स्थिति संभालना मुश्किल हो जाएगा.