पूर्व अमेरिकी राजनयिक और दक्षिण एशियाई मामलों की विशेषज्ञ लिंडसे फोर्ड ने भारत और रूस के संबंधों को लेकर अगले डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को बेहद गंभीर और तर्कसंगत चेतावनी दी है। फोर्ड के मुताबिक, अगर अमेरिका रूस के साथ अपने दशकों पुराने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को कम करने के लिए भारत पर अनुचित दबाव डालता है, तो यह दोनों देशों के द्विपक्षीय हितों के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।
भारत की सुरक्षा और रूस पर निर्भरता
लिंडसे फोर्ड ने साफ कर दिया है कि भारत अपनी सैन्य जरूरतों और रक्षा प्रणालियों के लिए लंबे समय से रूस पर निर्भर रहा है। रूसी तकनीक भारत के सैन्य बुनियादी ढांचे में इतनी गहराई तक समाई हुई है कि रातोंरात इन संबंधों को तोड़ने से भारत की आंतरिक और सीमा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। फोर्ड ने तर्क दिया कि अमेरिका को यह समझना चाहिए कि भारत को रूस से दूरी बनाने के लिए मजबूर करना सुरक्षा की दृष्टि से भारत को कमजोर करने के समान है।
विकल्पों के बिना दबाव व्यर्थ होगा
इस रिपोर्ट की सबसे अहम बात ये है कि अगर अमेरिका चाहता है कि भारत रूस पर अपनी निर्भरता कम करे तो अमेरिका को खुद एक विश्वसनीय और मजबूत सैन्य विकल्प के तौर पर आगे आना होगा. फोर्ड के अनुसार, जब तक अमेरिका भारत के सैन्य विकल्पों को पूरा नहीं करता और रूस से बेहतर सुरक्षा उपकरणों की गारंटी नहीं देता, तब तक यह उम्मीद करना मूर्खता है कि भारत रूस को छोड़ देगा। यदि अमेरिका भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने में विफल रहता है, तो भारत के पास रूस का साथ देने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।
रणनीतिक भेद्यता का जोखिम
लिंडसे फोर्ड ने चेतावनी देते हुए कहा कि विविधीकरण के नाम पर भारत को रूस से अलग करने का उनका प्रयास भारत के लिए वास्तविक कमजोरी पैदा कर सकता है। खासकर जब एशिया में चीन जैसी ताकतों से चुनौती हो तो भारत अपनी रक्षा तैयारियों से कोई समझौता नहीं कर सकता. भारत-अमेरिका संबंध इस समय नाजुक मोड़ पर हैं और रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच भारत अपनी स्वायत्तता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।