शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने भारत के साथ रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा क्षेत्रों को कवर करने वाले समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र और अंतरिक्ष अवसंरचना विकास और व्यावसायीकरण के लिए संयुक्त अरब अमीरात अंतरिक्ष एजेंसी के बीच एक आशय पत्र पर भी हस्ताक्षर किए गए। इस विशेष पहल के तहत, संयुक्त अरब अमीरात और भारत नए प्रक्षेपण परिसरों, उपग्रह निर्माण सुविधाओं, संयुक्त मिशनों, अंतरिक्ष अकादमियों और प्रशिक्षण केंद्रों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
यूएई अंतरिक्ष एजेंसी में क्या है खास?
यूएई अंतरिक्ष एजेंसी में कई अनूठी विशेषताएं हैं। जो इसे दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष एजेंसियों में से एक बनाती है। इसकी स्थापना 2014 में हुई थी और इतने कम समय में यह अरब और इस्लामिक दुनिया में पहली अंतरिक्ष एजेंसी बनकर उभरी है। इसने 2020 में मंगल ग्रह पर पहला अरब मिशन लॉन्च किया और 2021 में सफलतापूर्वक मंगल की कक्षा में पहुंच गया। यह अरब दुनिया से किसी अन्य ग्रह पर पहुंचने वाला पहला अंतरिक्ष यान था और मंगल पर पहुंचने वाला दुनिया का पांचवां देश था।
अंतरिक्ष में एक नई शक्ति
भारत के अंतरिक्ष मिशन और एजेंसियां नासा और रूसी एजेंसियों से लगातार प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत के इसरो ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। यूएई अंतरिक्ष एजेंसी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के बीच पहले से ही मजबूत संबंध हैं। 2016 में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। जिसमें एक संयुक्त कार्य समूह की स्थापना की गई थी।
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