भारत और कनाडा के बीच दो साल तक चले कूटनीतिक तनाव और शीत युद्ध जैसी स्थिति के बाद आखिरकार गतिरोध सुलझता नजर आ रहा है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने हाल ही में 6 और 7 फरवरी को कनाडा की राजधानी ओटावा का दौरा किया। यह दौरा महज औपचारिकता नहीं था, बल्कि दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को पटरी पर लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझा करना
यात्रा के दूसरे दिन 7 फरवरी को अजित डोभाल ने कनाडा के प्रधानमंत्री की उप सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया सलाहकार नताली ड्रोइन के साथ लंबी बैठक की. यह बैठक नियमित द्विपक्षीय सुरक्षा वार्ता का हिस्सा थी, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच विश्वास का माहौल बनाना था। इससे पहले डोभाल ने कनाडा के जन सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसांगी से भी अहम मुद्दों पर चर्चा की.
संयुक्त कार्य योजना एवं संपर्क अधिकारी
इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय संयुक्त कार्ययोजना बनाने का लिया गया है. भारत और कनाडा अब राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक-दूसरे का सहयोग करेंगे। इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए दोनों देशों ने आपसी संपर्क अधिकारी नियुक्त करने का फैसला किया है. ये अधिकारी सुरक्षा एजेंसियों के बीच एक सेतु का काम करेंगे, ताकि किसी भी आपात स्थिति या आपराधिक गतिविधि की स्थिति में समय पर सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सके।
मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें
दोनों देश निम्नलिखित महत्वपूर्ण मुद्दों पर मिलकर काम करने पर सहमत हुए हैं:
नशीली दवाओं की तस्करी: रसायनों, विशेष रूप से घातक ‘फेंटेनाइल’ से संबंधित रसायनों के अवैध व्यापार को रोकना।
संगठित अपराध: अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क और गैंगस्टरों पर कार्रवाई।
साइबर सुरक्षा: साइबर हमलों को रोकने के लिए औपचारिक नीतियां स्थापित करना और तकनीकी जानकारी साझा करना।
आप्रवासन और धोखाधड़ी: अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार वीज़ा धोखाधड़ी और आप्रवासन संबंधी मुद्दों का समाधान करना।