बलूचिस्तान प्रांत में लंबे समय से चल रहे संघर्ष के बीच, बीएलए ने कहा है कि “ऑपरेशन हीरो II” के दौरान पकड़े गए सात पाकिस्तानी सैनिकों को उनके कथित “बलूच नेशनल कोर्ट” द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद फांसी दे दी गई है। इस दावे से पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
क्या है पूरा मामला?
बीएलए के मुताबिक, 14 फरवरी को ग्रुप ने 17 पाकिस्तानी सैनिकों को बंधक बना लिया था. इनमें से 10 सैनिकों को यह कहकर रिहा कर दिया गया कि वे बलूच समुदाय के हैं. बीएलए ने शेष सैनिकों को लेकर पाकिस्तान सरकार से कैदियों की अदला-बदली की मांग की।
14 दिन की मोहलत दी गई
इसके लिए 14 दिन की समय सीमा दी गयी थी. बाद में समय सीमा बढ़ा दी गई, लेकिन बीएलए के दावे के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारियों ने कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की। परिणामस्वरूप, बीएलए ने अंतिम अल्टीमेटम को विफल घोषित कर दिया और सात सैनिकों को मार डाला।
बलूच राष्ट्रीय न्यायालय का दावा
बीएलए ने अपने बयान में कहा कि सभी सात सैनिक पाकिस्तान सशस्त्र बलों की नियमित इकाइयों में सेवारत थे। उन पर “जबरन लापता होने के मामले, नागरिकों के खिलाफ अत्याचार और युद्ध अपराध” का आरोप लगाया गया था। बीएलए ने कहा कि आरोपों की सुनवाई बलूच राष्ट्रीय न्यायालय ने की। यह अदालत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मान्यता प्राप्त नहीं है, लेकिन बीएलए इसे अपने संघर्ष का हिस्सा मानता है।
बलूचिस्तान संघर्ष
बलूचिस्तान प्रांत में वर्षों से उग्रवाद भड़का हुआ है। बीएलए जैसे संगठन पाकिस्तान से आजादी या अधिक स्वायत्तता के लिए लड़ रहे हैं। वे पाकिस्तानी सेना और सरकारी संस्थानों पर हमले करते रहे हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार इन समूहों को आतंकवादी संगठन मानती है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। इस ताजा दावे से प्रांत में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। हालाँकि, इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से बलूचिस्तान में तनाव और बढ़ सकता है। कैदियों की अदला-बदली पर बातचीत विफल होने के बाद दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बढ़ गया है। ऐसे में शांति और बातचीत की जरूरत और भी अहम हो जाती है. फिलहाल स्थिति संवेदनशील है और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।
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