इस फैसले ने पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आजादी और मीडिया की आजादी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
अभिव्यक्ति की आजादी पर गंभीर सवाल
पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आजादी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट और वीडियो शेयर करना कई पत्रकारों और विश्लेषकों को महंगा पड़ गया है। पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधक अदालत ने ऐसे ही मामलों में चार पत्रकारों समेत आठ लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. सारी सज़ाएँ उनकी अनुपस्थिति में दी गईं।
क्या माजरा था?
मामला 9 मई 2023 को हुई हिंसा से जुड़ा है, जब इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने कई सैन्य चौकियों पर हमला कर दिया था. इसके बाद, सरकार और सेना ने इमरान खान की पार्टी, पीटीआई और आलोचनात्मक आवाज़ों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। आजीवन कारावास की सजा पाने वालों में पूर्व सैन्य अधिकारी से यूट्यूबर बने आदिल राजा और सैयद अकबर हुसैन, पत्रकार वजाहत सईद खान, साबिर शाकिर और शाहीन सहबाई, कमेंटेटर हैदर रजा मेहदी और विश्लेषक मोईद पीरजादा शामिल हैं।
मानवाधिकार संगठनों की कड़ी प्रतिक्रिया
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट ने इस कार्रवाई को प्रतिशोध की राजनीति करार दिया है। संगठन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य आलोचनात्मक पत्रकारिता को दबाना और मीडिया को डराना है। सीपीजे ने मांग की है कि इन मामलों को तुरंत वापस लिया जाए और पत्रकारों को धमकाना और सेंसरशिप बंद की जाए। जानकारों का मानना है कि इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है.
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