अमेरिका की बढ़ती टैरिफ धमकियों और व्यापार संघर्ष नीतियों के बीच भारत को यूरोपीय संघ से मजबूत समर्थन मिल रहा है। यूरोपीय संघ के विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के उच्च प्रतिनिधि काजा कैलास ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भारत सिर्फ एक विकासशील देश नहीं बल्कि यूरोप के लिए एक रणनीतिक और आर्थिक शक्ति के रूप में उभरा है।
भारत के साथ यूरोपीय संघ का व्यापार
काजा कैलास ने यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए कहा, “भारत दिन-ब-दिन यूरोप की आर्थिक शक्ति के लिए अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है।” उन्होंने संकेत दिया कि यूरोपीय संघ भारत के साथ व्यापार, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और लोगों से लोगों के संबंधों को कवर करते हुए एक नया और शक्तिशाली एजेंडा तैयार करना चाहता है।
भारत-यूरोपीय संबंधों में एक नया इतिहास
गौरतलब है कि यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व के 2026 के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की संभावना है। यह घटना भारत-यूरोप संबंधों में एक नया इतिहास रच सकती है. 16वां ईयू-भारत शिखर सम्मेलन 26 जनवरी के बाद होने वाला है, जिसमें कई महत्वपूर्ण व्यापार और रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञ क्या सोचते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की सख्त व्यापार नीतियां भारत के लिए एक अवसर हो सकती हैं। यूरोपीय कंपनियाँ अब चीन और अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करते हुए भारत को एक वैकल्पिक और विश्वसनीय भागीदार के रूप में देख रही हैं। विशेषकर विनिर्माण, हरित ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है।
भारत का महत्व बढ़ा
इस बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत का महत्व बढ़ता जा रहा है। यूरोपीय संघ के साथ बढ़ती दोस्ती से भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, निवेश और रोजगार सृजन में बड़ा फायदा मिल सकता है। ऐसे में ट्रंप की टैरिफ नीतियों से पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भारत के लिए नए अवसरों के दरवाजे खुलते नजर आ रहे हैं।
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