54 साल में पहली बार जापान का कोई चिड़ियाघर पांडा विहीन होगा। जापान के टोक्यो में उएनो चिडियागढ़ के दो प्यारे पांडा, जिओ जिओ और लेई लेई, मंगलवार को चीन वापस जा रहे हैं। रविवार को आखिरी बार जुड़वां पांडा को देखने के लिए हजारों जापानी नागरिक उमड़ पड़े और कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
पांडा कूटनीति क्या है?
इस कहानी की शुरुआत 1972 में हुई थी। जब चीन और जापान के बीच बहुत तनाव था, तो चीन ने रिश्ते सुधारने के लिए जापान को ‘कांग कांग’ और ‘लैन लैन’ नाम के दो पांडा उपहार में दिए थे। इसे ‘पांडा डिप्लोमेसी’ कहा गया, जिसका उद्देश्य जानवरों के प्रति प्रेम की आड़ में देशों के बीच मतभेदों को कम करना था। तत्कालीन जापानी प्रधान मंत्री काकुई तनाका ने ताइवान पर चीन के दावे को मान्यता देकर इस दोस्ती की शुरुआत की।
ये पांडा वापस क्यों जा रहे हैं?
चीनी नीति के अनुसार, दुनिया में कहीं भी पैदा होने वाले पांडा का कानूनी अधिकार चीन का है। चीन इन पांडाओं को दूसरे देशों को ‘पट्टे पर’ (किराए पर) देता है। जिओ जिओ और लेई लेई का जन्म 2021 में जापान में हुआ था, लेकिन अनुबंध के अनुसार उनका समय समाप्त होने के कारण अब उन्हें चीन भेजा जा रहा है।
रिश्तों में कड़वाहट और भविष्य की चिंता
आमतौर पर चीन पुराने पांडा वापस आने पर नए पांडा भेजता है, लेकिन इस बार इसकी संभावना बहुत कम है। इस समय चीन और जापान के बीच राजनयिक संबंध कई वर्षों में सबसे निचले स्तर पर हैं। समुद्री सीमा विवाद और वैश्विक राजनीति ने दोनों देशों के बीच दूरियां बढ़ा दी हैं।
एक सांस्कृतिक हस्ती को विदाई
जापान के लिए यह सिर्फ एक जानवर की विदाई नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक हस्ती है। पांडा पर्यटन से जापान को जो आर्थिक लाभ मिलता था, वह अब बंद हो जाएगा। बड़ा सवाल ये है कि क्या इस ‘पांडा डिप्लोमेसी’ का ख़त्म होना दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का संकेत है?