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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह संकेत देकर दुनिया को चौंका दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा संघर्ष अब अपने अंतिम चरण में है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अगले दो से तीन सप्ताह में ईरान से अपना सैन्य अभियान वापस ले सकता है। सबसे अहम बात ये है कि ट्रंप के मुताबिक इसके लिए ईरान के साथ औपचारिक शांति समझौता जरूरी नहीं है.
परमाणु हथियारों को रोकने का उद्देश्य पूरा हुआ
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना था, जिसे अब उसने सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मेरा लक्ष्य कभी भी सत्ता परिवर्तन नहीं था, बल्कि केवल परमाणु हथियारों को रोकना था। आज ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की स्थिति में नहीं है. ट्रंप के मुताबिक, ईरान का मौजूदा नेतृत्व पहले से ज्यादा समझदारी दिखा रहा है, जिससे अब युद्ध जारी रखने का कोई तार्किक कारण नहीं रह गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: सहयोगियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी
ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी सख्त रुख अपनाया है. जिस समुद्री रास्ते से दुनिया की 20 फीसदी तेल आपूर्ति गुजरती है, उसकी सुरक्षा के बारे में उन्होंने कहा, ”अब इस जलमार्ग की सुरक्षा करना अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है. उन्होंने चीन, फ्रांस और अन्य देशों से साफ कहा है कि जो देश इस रास्ते पर निर्भर हैं, उन्हें अपने तेल जहाजों की सुरक्षा खुद करनी चाहिए.”
एक नई वैश्विक व्यवस्था का संकेत
ट्रंप के इस फैसले से साफ हो गया है कि अमेरिका अब ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत दूसरे देशों के झगड़ों से बाहर निकलना चाहता है. यदि अमेरिकी सेना अगले 20-25 दिनों में ईरान के खिलाफ अपना अभियान समाप्त कर देती है, तो पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है। खासकर तेल की कीमतों और सुरक्षा के लिए अब चीन और यूरोपीय देशों को मैदान में आना होगा.