अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध का समर्थन नहीं करने के लिए नाटो देशों को आड़े हाथों लिया है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर सहयोगी देशों को ‘कायर’ बताया और कहा कि अमेरिका के बिना नाटो बिल्कुल ‘कागजी शेर’ की तरह है. ट्रंप की आक्रामक टिप्पणियों से वैश्विक राजनीति गरमा गई है.
होर्मुज जलडमरूमध्य मुद्दे पर नाराजगी
ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के बीच जंग जारी है, जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. ट्रंप ने खास तौर पर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर नाराजगी जताई. समुद्री मार्ग वर्तमान में ईरान के नियंत्रण में है, जहाँ से दुनिया की अधिकांश तेल और गैस आपूर्ति होती है।
‘काहिरा, हम इसे याद रखेंगे!’
ट्रंप के मुताबिक, नाटो देश तेल की ऊंची कीमत की शिकायत करते हैं, लेकिन इस मार्ग को सुरक्षित करने के लिए सैन्य मदद करने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा, होर्मुज को खोलना एक साधारण सैन्य कदम है, फिर भी सहयोगी पीछे हट रहे हैं। काहिरा, हम इसे याद रखेंगे!
नाटो देशों की प्रतिक्रिया
उधर, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और जापान समेत 7 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट किया कि वे समुद्री सुरक्षा प्रयासों में शामिल हो सकते हैं, लेकिन उससे पहले युद्धविराम जरूरी है. जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस स्तर पर सीधे युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून का अनुपालन अधिक महत्वपूर्ण है।
अगर नाटो देश सहयोग नहीं करेंगे तो…
ट्रंप ने पहले 15 और 17 मार्च को चेतावनी दी थी कि अगर नाटो देश सहयोग नहीं करेंगे तो नाटो का भविष्य ख़तरे में पड़ सकता है. ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका इन देशों की सुरक्षा पर हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है, लेकिन जरूरत के वक्त ये देश पीछे हट जा रहे हैं।
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