मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। कच्चे तेल के आयात पर निर्भर देश बढ़ती कीमतों से बचने के लिए एहतियाती कदम उठा रहे हैं। ऐसे में चीन ने मार्च में दूसरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की है, जबकि भारत में कीमतें स्थिर रखी गई हैं.
चीन ने मार्च में दो बार कीमतें बढ़ाईं
चीन के राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग द्वारा हर 10 दिनों में ईंधन की कीमतों की समीक्षा की जाती है। ताजा बदलाव में पेट्रोल में 1160 युआन प्रति टन और डीजल में 1115 युआन प्रति टन की बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले मार्च में भी पेट्रोल में 695 युआन और डीजल में 670 युआन प्रति टन की बढ़ोतरी की गई थी।
चीन पर क्यों पड़ रहा है असर?
चीन अपनी कच्चे तेल की लगभग 70% जरूरतें आयात से पूरी करता है। जिसका 45% तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। क्षेत्र में जारी तनाव के कारण चीन की 30% तेल आपूर्ति खतरे में है, जिससे चीन को बार-बार कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
भारत में स्थिति स्थिर
वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अपरिवर्तित बनी हुई हैं। फिलहाल दिल्ली में पेट्रोल करीब 94.77 रुपये प्रति लीटर और मुंबई में 103.54 रुपये प्रति लीटर है। जबकि दिल्ली में डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर और मुंबई में 90.03 रुपये प्रति लीटर है।
चीन में मूल्य गणना
चीन में ईंधन की कीमतों की गणना लीटर के बजाय प्रति टन की जाती है। आमतौर पर 1 टन पेट्रोल लगभग 1300 से 1400 लीटर के बराबर होता है और 1 टन डीजल 1136 से 1220 लीटर के बराबर होता है। ऐसे में सीधी तुलना करना मुश्किल है, लेकिन लगातार कीमतों में बढ़ोतरी से चीन की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।