वैश्विक राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ईरान के परमाणु शस्त्रागार को सुरक्षित करने या जब्त करने के लिए एक बेहद गोपनीय और साहसी सैन्य मिशन पर विचार कर रहे हैं। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ईरान के पास मौजूद लगभग 450 किलोग्राम (60% समृद्ध) यूरेनियम को पकड़ना है, जिसे परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब माना जाता है।
मिशन योजना और रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद ये चर्चाएं तेज हो गई हैं. मिशन के लिए मुख्य रूप से दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। सुरक्षित भूमिगत सुविधाओं से यूरेनियम निकालने के लिए ईरानी धरती पर विशेष बल उतारना। परमाणु विशेषज्ञों और विशेष बलों को भेजकर साइट पर यूरेनियम संवर्धन क्षमता को कम करना।
यह कार्रवाई कब और कैसे होगी?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह किसी बड़े पैमाने के युद्ध की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि एक ‘सटीक सर्जिकल ऑपरेशन’ की तरह होगी। मिशन तभी शुरू किया जाएगा जब यह आश्वस्त हो जाए कि ईरानी सेना इन ताकतों के लिए कोई बड़ी बाधा नहीं खड़ी कर सकती। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हालिया बयान के मुताबिक, आखिरकार किसी को वहां जाना होगा और इस खतरे को खत्म करना होगा।
परमाणु वैज्ञानिकों की भूमिका
इस मिशन में न केवल सैनिक, बल्कि परमाणु वैज्ञानिक और संभवतः अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के विशेषज्ञ भी शामिल हो सकते हैं। यदि ईरान अपने 60% समृद्ध यूरेनियम को 90% तक ले जाता है, तो वह एक विनाशकारी परमाणु बम बना सकता है, जो इज़राइल और पश्चिम के लिए एक बड़ा खतरा है।