नेपाल के बाद अब ईरान में भी जेन जेड पीढ़ी खुलकर सरकार के खिलाफ आ गई है. राजधानी तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों में युवा “यह अंतिम लड़ाई है” जैसे नारे लगाते हुए सड़कों पर उतर रहे हैं। ये नारे स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं कि लोग अब सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के खिलाफ अंतिम लड़ाई के लिए तैयार हैं। प्रदर्शन सड़कों तक ही सीमित नहीं हैं. शॉपिंग मॉल, बाज़ार और व्यावसायिक क्षेत्र भी विरोध का केंद्र बन गए हैं। सुरक्षा बलों द्वारा आंसू गैस और रबर की गोलियों के इस्तेमाल के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे.
आर्थिक संकट: विरोध की मुख्य चिंगारी
ईरान में इस जन आंदोलन की सबसे बड़ी वजह देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था है. सख्त अमेरिकी प्रतिबंधों और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर दबाव में है। ईरान की मुद्रा रियाल ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई है। हाल ही में रियाल की कीमत एक डॉलर के मुकाबले 14 लाख तक पहुंच गई, जिससे महंगाई चिंताजनक रूप से बढ़ गई है. भोजन, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरतें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। शुरुआत में व्यापारी और दुकानदार सड़कों पर उतरे, लेकिन जल्द ही छात्र, युवा और मध्यम वर्ग भी विरोध में शामिल हो गए।
खामनेई की नीतियों के खिलाफ बढ़ रहा असंतोष
जेन जेड पीढ़ी न केवल मुद्रास्फीति, बल्कि वर्षों के सख्त शासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध और भविष्य के अवसरों की कमी से नाराज है। युवाओं का मानना है कि देश का नेतृत्व उनकी समस्याओं को समझने में नाकाम रहा है. इस कारण यह आंदोलन अब न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक रूप भी धारण करता जा रहा है। सड़कों पर झड़पें, सुरक्षा बलों की कार्रवाई
तेहरान और मशहद जैसे शहरों में प्रदर्शनों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीव्र झड़पें देखी गईं। ईरान के विपक्षी संगठन एनसीआरआई के मुताबिक, जम्हौरी स्ट्रीट, नासिर खोस्रो स्ट्रीट और इस्तांबुल स्क्वायर जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए. पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस छोड़ी और लाठीचार्ज किया, लेकिन विरोध जारी रहा। सरकारी दफ्तरों और व्यावसायिक इलाकों के आसपास स्थिति तनावपूर्ण हो गई है.
क्या इस आंदोलन से बदल जाएगी ईरान की राजनीति?
जेन जेड द्वारा शुरू किया गया यह विद्रोह ईरान के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है. अगर बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और असंतोष जारी रहा तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। पूरी दुनिया की नजर अब ईरान पर है कि क्या युवाओं का यह विद्रोह सिर्फ विरोध प्रदर्शन तक ही सीमित रहेगा या देश के भविष्य की दिशा बदल देगा.