मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष अब बेहद विनाशकारी स्थिति में पहुंच गया है. गुरुवार की सुबह, ईरान ने छह दिवसीय युद्ध को तेज करते हुए इज़राइल पर मिसाइल हमलों की एक श्रृंखला शुरू की। जवाबी कार्रवाई में अमेरिका और इजराइल ने ईरान की सैन्य सुविधाओं और परमाणु कार्यक्रमों को निशाना बनाया है.
भीषण सैन्य कार्यवाही एवं हानि
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के अनुसार, हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो से एक शक्तिशाली ईरानी युद्धपोत डूब गया है। इस घटना में 87 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 32 लोगों को बचाया गया है. उधर, इजराइल ने भी लेबनान और बेरूत के दक्षिणी इलाकों में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। बुधवार के हमले इतने हिंसक थे कि ईरानी टीवी को सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए एक स्मारक सेवा रद्द करनी पड़ी।
युद्ध में कई लोगों की जान चली गयी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना के प्रदर्शन की सराहना की और कहा कि युद्ध के मोर्चे पर स्थिति मजबूत है. हालाँकि, युद्ध ने ईरान में 1,000 से अधिक, लेबनान में 70 और इज़राइल में एक दर्जन से अधिक लोगों की जान ले ली है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में बहरीन और कुवैत को निशाना बनाया है, जबकि तुर्की का दावा है कि उसने हवा में ही ईरानी मिसाइलों को मार गिराया है.
गैस और तेल आपूर्ति पर युद्ध का प्रभाव
इस महायुद्ध के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। मध्य पूर्व में लाखों यात्री फंसे हुए हैं और पड़ोसी देश भी हिंसा से जूझ रहे हैं. इजराइल का मानना है कि वह ईरानी जनता में शासन विरोधी भावना पैदा करके इस खूनी युद्ध को खत्म करना चाहता है।
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