ईरान में हाल की घटनाओं ने मध्य पूर्व की राजनीति को एक बार फिर गर्म कर दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद देश में शोक, गुस्सा और अनिश्चितता का माहौल है। उनकी मृत्यु के बाद, पवित्र शहर क़ोम में प्रसिद्ध जामकरन मस्जिद के गुंबद पर एक लाल “बदला झंडा” फहराया गया था।
‘लाल झंडा’ का क्या मतलब है?
ईरानी धार्मिक परंपरा में लाल झंडे को शहादत और बदले का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से शिया परंपरा में, जब किसी महत्वपूर्ण नेता या धार्मिक व्यक्ति की मृत्यु अकारण या किसी हमले से जुड़ी होती है, तो लाल झंडा फहराया जाता है। ये संदेश सिर्फ शोक नहीं है, बल्कि न्याय और बदले की मांग है. जामकरन मस्जिद धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। यहां झंडा फहराना सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि देश और दुनिया को यह संकेत देना है कि ईरान इस घटना को गंभीरता से लेता है।
हवाई हमले और वैश्विक प्रतिक्रिया
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दावा किया गया कि तेहरान में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई की मौत हो गई। बाद में ईरान की सरकारी मीडिया ने भी उनकी मौत की पुष्टि की. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान देते हुए खामेनेई को इतिहास के सबसे खराब नेताओं में से एक बताया और ईरानी लोगों से अपने भविष्य के लिए खड़े होने की अपील की. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा कि कई संकेत बताते हैं कि खामेनेई अब जीवित नहीं हैं. उन्होंने ईरान के नागरिकों से मौजूदा शासन के खिलाफ एकजुट होने की अपील की.
ईरान में संक्रमणकालीन नेतृत्व
खामेनेई की मृत्यु के बाद, ईरान ने तुरंत एक संक्रमणकालीन नेतृत्व का गठन किया। तीन सदस्यीय परिषद में 66 वर्षीय मौलवी अलीरेज़ा अराफ़ी को शामिल किया गया है. सम्मेलन में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान और मुख्य न्यायाधीश घोलम-होसैन मोहसेनी-एजेई शामिल थे। यह परिषद नये सर्वोच्च नेता के चयन तक देश का नेतृत्व संभालेगी। आने वाले दिनों में विशेषज्ञों की बैठक कर नये नेता का चयन किया जायेगा.
आगे क्या?
ईरान में इस समय राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। लाल झंडा फहराना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश इस आयोजन को शोक तक सीमित नहीं रखेगा। वैश्विक राजनीति में इस घटना का प्रभाव लंबे समय तक देखा जा सकता है।
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