हाल ही में ईरान पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान में इसे लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है. इस मुद्दे पर न सिर्फ आम जनता बल्कि संसद में बैठे नेता और सांसद भी तीखे बयान दे रहे हैं. पाकिस्तान की संसद में इस मुद्दे पर बहस के दौरान जमकर हंगामा हुआ.
संसद में अब्दुल कादिर पटेल का बयान
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सांसद अब्दुल कादिर पटेल ने संसद में एक बयान दिया जिससे बहस तेज हो गई. उन्होंने कहा कि ईरान पर हमले के बाद पाकिस्तान भी अगला निशाना हो सकता है. उनके इस बयान के बाद संसद में मौजूद अन्य सदस्यों के बीच चर्चा और विरोध शुरू हो गया.
“अब पाकिस्तान की बारी आ सकती है”
सांसद अब्दुल कादिर पटेल ने कहा कि मध्य पूर्व में चल रही घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. उनके मुताबिक, पहले कई देशों पर दबाव पड़ा है और अब पाकिस्तान पर भी खतरा मंडरा सकता है. उन्होंने संसद में कहा कि अगर ईरान को नुकसान होता है तो इसका असर पाकिस्तान पर भी पड़ सकता है. उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि महज राजनीतिक समझौते या दोस्ती पाकिस्तान को नहीं बचा सकती. उन्होंने एक मीम का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें पाकिस्तान एक तरफ ईरान से कह रहा है कि हम आपके साथ हैं और दूसरी तरफ सऊदी अरब से भी यही कह रहा है. फिर दोनों देश एक-दूसरे को फोन करते हैं और पाकिस्तान से कहते हैं, ”आप शांति से बैठें.” इस उदाहरण के जरिए उन्होंने पाकिस्तान की विदेश नीति की आलोचना की.
खराबी के मुद्दे पर भी बयान
बहस के दौरान अब्दुल कादिर पटेल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को लेकर भी भावुक बयान दिया और उन्हें ‘शहीद’ बताया. इस बयान के बाद संसद में आगे की चर्चा शुरू हो गई. उन्होंने अमेरिका और इजराइल की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पहले भी कई देशों में ऐसे आरोपों को लेकर हमले किये गये हैं.
“ईरान बहाना है, पाकिस्तान निशाना है”
पाकिस्तानी संसद के एक अन्य सदस्य अली मुहम्मद खान ने भी चेतावनी दी कि ईरान एकमात्र लक्ष्य नहीं है। उनके मुताबिक, कुछ अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक तनावों के कारण पाकिस्तान को भविष्य में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि देश को अपनी सुरक्षा और नीतियों के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए. उन्होंने इस मुद्दे पर पुराने राजनीतिक बयानों का जिक्र किया और कहा कि पहले भी ऐसे विचार व्यक्त किये गये हैं.
हमले के बाद पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन
ईरान पर हमले की खबर के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. कराची, लाहौर, इस्लामाबाद, पेशावर और गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए. कुछ जगहों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई. प्रदर्शनकारियों ने कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास प्रदर्शन किया. सुरक्षा बलों के साथ झड़पें भी हुईं. बताया गया कि इन घटनाओं में कई लोग घायल हुए हैं. विरोध प्रदर्शन के दौरान गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में भी तनाव बढ़ गया, जिसके कारण सरकार को कर्फ्यू लगाना पड़ा और कुछ क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को तैनात करना पड़ा।
सरकार पर बढ़ते सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश में पाकिस्तान की विदेश नीति और सुरक्षा मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. विपक्षी दलों के नेता और कुछ सरकारी सहयोगी भी सरकार से स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं. विश्लेषकों के मुताबिक, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर भी पड़ रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर पाकिस्तान में और भी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है.
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