इज़राइल ईरान युद्ध: ईरान पर हमले के बाद रूस का सख्त संदेश, "अंतरराष्ट्रीय कानून का अंत?"

Neha Gupta
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पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद वैश्विक चिंता बढ़ गई है. रूस ने इस स्थिति पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और कहा है कि “अंतर्राष्ट्रीय कानून अब वास्तव में मौजूद नहीं है।”

क्या कानून सिर्फ कागजों पर है?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक इंटरव्यू में कहा कि आज की दुनिया में जिसे हम अंतरराष्ट्रीय कानून कहते हैं, वह अब सिर्फ किताबों पर है। उन्होंने बताया कि कानून “डी ज्यूर” यानी कानून के अनुसार मौजूद है, लेकिन “वास्तविक” यानी वास्तव में यह भूमि पर लागू नहीं होता है। पेसकोव ने सवाल उठाया कि अगर कानून का पालन नहीं किया गया तो फिर मतलब ही क्या है?

पी-5 बैठक का प्रस्ताव फिर भेजा गया

पेसकोव ने याद दिलाया कि कोरोना महामारी से पहले पुतिन ने दुनिया की पांच प्रमुख शक्तियों की बैठक बुलाने का प्रस्ताव रखा था. ये पांच देश हैं- रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन। ये देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं, जिन्हें पी-5 के नाम से जाना जाता है। मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए रूस ने फिर बैठक बुलाने की मांग की है ताकि वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा हो सके.

आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव का डर

रूस ने चेतावनी दी है कि ईरान पर हमले सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं रहेंगे. अगर तनाव बढ़ा तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा. इसका सीधा असर तेल की कीमतों, व्यापार मार्गों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।

अमेरिका के खिलाफ सीधी मांग

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि अमेरिका को अपनी हरकतें स्पष्ट करनी चाहिए. उन्होंने पूछा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानदंडों के अनुरूप कैसे है। लावरोव ने कहा कि अब दुनिया के लिए यह तय करने का समय आ गया है कि वह किस दिशा में जा रही है- बातचीत और कानून का रास्ता या सत्ता और युद्ध का रास्ता।

मौजूदा हालात क्या दर्शाते हैं?

ईरान-अमेरिका-इज़राइल तनाव से पता चलता है कि वैश्विक राजनीतिक संतुलन बदल रहा है। एक तरफ ताकतवर देश अपनी सुरक्षा और हितों की बात करते हैं तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय कानून और संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं. अगर पी-5 की बैठक होती है तो शायद वैश्विक तनाव कम करने का नया रास्ता मिल सकता है. लेकिन अगर राजनीतिक बातचीत नहीं हुई तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है.

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