पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच 10 दिनों से चल रहे सैन्य संघर्ष के बाद पेंटागन ने पहली बार अमेरिकी सैन्य हताहतों की विस्तृत जानकारी जारी की है। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल के मुताबिक, संघर्ष में अब तक करीब 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं.
सैनिकों की स्थिति और हताहत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्यादातर जवानों को मामूली चोटें आईं, जिनमें से 108 जवानों को प्राथमिक उपचार के बाद दोबारा तैनात कर दिया गया है। हालांकि, 8 जवानों की हालत गंभीर है और उनका फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि ईरान के जवाबी रॉकेट और ड्रोन हमलों में कुवैत और सऊदी अरब में तैनात 7 अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और ट्रम्प की चेतावनी
इस तनातनी के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा बिछाए जा रहे विस्फोटकों (खदानों) को लेकर गंभीर चिंता जताई है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर साफ शब्दों में लिखा है कि अगर ईरान ने इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में किसी भी तरह की खदानें लगाई हैं तो उन्हें तुरंत हटाना होगा. यदि ईरान ऐसा करने में विफल रहता है, तो उसे ‘अभूतपूर्व’ सैन्य परिणाम भुगतने होंगे जिनकी वह कल्पना भी नहीं कर सकता।
वैश्विक तेल व्यापार पर संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के तेल व्यापार की जीवन रेखा है, क्योंकि विश्व के कुल तेल व्यापार का 20 प्रतिशत इसी संकीर्ण मार्ग से होकर गुजरता है। अगर ईरान केवल 33 किलोमीटर चौड़े इस मार्ग को अवरुद्ध कर देता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। अमेरिका अब अपने सैनिकों की सुरक्षा और इस जलमार्ग को खुला रखने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिख रहा है।
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