अमेरिकी राज्य टेक्सास के गवर्नर ने अमेरिका फर्स्ट की नीति को प्राथमिकता देते हुए एक प्रमुख कार्यकारी आदेश की घोषणा की है। निर्णय के तहत, सभी टेक्सास सरकारी एजेंसियों और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को मई 2027 तक नए एच-1बी वीजा से रोक दिया गया है। ये प्रतिष्ठान इस अवधि के दौरान विदेशी श्रमिकों को काम पर नहीं रख सकते हैं।
भारत पर इसका कितना असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह खबर चिंताजनक लग सकती है, लेकिन भारत पर इसका वास्तविक असर नगण्य होगा। मुख्य कारण यह है कि केवल 2 से 3 प्रतिशत भारतीय ही टेक्सास की सरकारी एजेंसियों और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में कार्यरत हैं या पढ़ रहे हैं। ज्यादातर भारतीय पेशेवर आईटी और निजी क्षेत्र में काम करते हैं, जिन पर इस प्रतिबंध का सीधा असर नहीं पड़ेगा।
वीज़ा शुल्क वृद्धि के ख़िलाफ़ कानूनी लड़ाई
उधर, ट्रंप सरकार द्वारा वीजा फीस में भारी बढ़ोतरी के खिलाफ अमेरिका के 20 राज्यों ने मोर्चा खोल दिया है. इन राज्यों ने फीस बढ़ोतरी के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी है. अगर कोर्ट इस फीस बढ़ोतरी को वापस लेने का आदेश देता है तो अमेरिका जाने का सपना देख रहे हजारों भारतीयों को आर्थिक फायदा होगा.
विशेषज्ञ दृश्य- विजय पटेल, वीज़ा विशेषज्ञ, अहमदाबाद
टेक्सास के फैसले से भारतीय आईटी सेक्टर को बड़ा झटका लगने की संभावना नहीं है, क्योंकि यह एक सीमित प्रतिबंध है। साथ ही, अगर 20 राज्यों की कानूनी लड़ाई सफल होती है और फीस बढ़ोतरी वापस हो जाती है, तो यह भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए राहत की खबर होगी।
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