जहां मध्य पूर्व में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं, वहीं दक्षिण एशिया में भी भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में गहरा तनाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हुए भारत से ‘सार्थक बातचीत’ की अपील की है. हालाँकि, भारत के लिए यह अपील नई नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान का ‘संवाद और आतंकवाद’ का दोहरा चेहरा पहले भी कई बार उजागर हो चुका है।
तनाव का प्रमुख कारण: पहलगाम हमला और ‘ऑपरेशन सिन्दूर’
दोनों देशों के रिश्तों में ताजा खटास अप्रैल में आई। कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने आक्रामक रुख अपनाया है. भारत ने ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के तहत आतंकी नेटवर्क को करारा जवाब दिया, जिसके बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. राष्ट्रपति जरदारी अब भारत को आतंकवाद से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन भारत का रुख स्पष्ट है: जब तक सीमा पार आतंकवाद नहीं रुकता, तब तक कोई चर्चा संभव नहीं है।
खेल के मैदान पर भी अविश्वास दिखाई दे रहा है
यह तनाव सिर्फ सीमाओं या राजनयिक दफ्तरों तक ही सीमित नहीं है, इसका असर खेल के मैदान पर भी साफ दिख रहा है. क्रिकेट के मैदान पर भी दोनों देशों की दोस्ती अब इतिहास बन गई लगती है. भारतीय खिलाड़ियों का पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से इनकार. भारत आने में पाकिस्तान की अनिच्छा और सुरक्षा संबंधी बहाने। ये सारी घटनाएं बताती हैं कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई कितनी गहरी है. खिलाड़ियों की शारीरिक भाषा और दर्शकों का आक्रोश रिश्ते की कड़वाहट की गवाही देता है।
जरदारी के बयान पर सवाल
विश्लेषकों का मानना है कि जरदारी का बयान दुनिया के सामने पाकिस्तान की छवि सुधारने की एक कोशिश मात्र है. हालांकि भारत की सुरक्षा एजेंसियां अभी भी पहलगाम हमले में पाकिस्तानी आतंकी संगठनों की भूमिका की जांच कर रही हैं, लेकिन ऐसी शांति वार्ता की संभावना नहीं है। भारत ने पहले कहा है कि अगर पाकिस्तान वास्तव में शांति चाहता है, तो उसे अपनी धरती पर चल रहे आतंकी शिविरों और उनके आकाओं के खिलाफ ‘ठोस और स्पष्ट’ कार्रवाई करनी होगी।