मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अजरबैजान का नाम अचानक अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अजरबैजान पर ड्रोन हमला किया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। इस घटना के बाद अजरबैजान ने स्पष्टीकरण के लिए ईरानी राजदूत को तलब किया.
पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों के करीब
राजनीतिक तौर पर अज़रबैजान को पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों का क़रीबी माना जाता है. देश कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर पाकिस्तान के समर्थन में बयान देता रहा है. “ऑपरेशन सिन्दूर” के दौरान अज़रबैजान ने पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति भी व्यक्त की। लेकिन राजनीतिक रिश्तों की इस कहानी के बीच एक दिलचस्प सच ये है कि अज़रबैजान का भारत के साथ बहुत पुराना सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ता है.
अजरबैजान का प्राचीन ज्वाला मंदिर
अज़रबैजान की राजधानी बाकू के पास स्थित अतेशगाह मंदिर भारत के साथ संबंधों का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। इस मंदिर को “अग्नि मंदिर” या “ज्वाला मंदिर” के नाम से जाना जाता है। यहां जमीन से निकलने वाली प्राकृतिक गैस की आग लगातार जलती रहती थी, जिसके कारण प्राचीन काल में यह स्थान आध्यात्मिक केंद्र बन गया था। इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर की वर्तमान संरचना का विकास 17वीं और 18वीं शताब्दी के दौरान हुआ था। उस काल में भारत से व्यापारी और भिक्षु यहाँ आये और इस स्थान को एक धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया।
संस्कृत शिलालेखों और गणेश मंत्रों से साक्ष्य
अतेशगाह मंदिर के परिसर में पाए गए कई शिलालेख इस स्थल के भारतीय मूल की ओर इशारा करते हैं। कुछ शिलालेख संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं। इसमें “श्री गणेशाय नमः” जैसे शब्द शामिल हैं, जो हिंदू परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा, मंदिर के कुछ हिस्सों में त्रिशूल चिन्ह और अन्य हिंदू धार्मिक प्रतीक भी पाए जाते हैं। अतः यह स्पष्ट है कि एक समय था जब भारतीय व्यापारी और तीर्थयात्री यहाँ आकर पूजा करते थे।
भारत और अज़रबैजान के आधुनिक संबंध
सांस्कृतिक संबंधों के अलावा भारत और अज़रबैजान के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंध भी मजबूत रहे हैं। 1991 में जब अज़रबैजान सोवियत संघ से स्वतंत्र हुआ, तो भारत इसे मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक था। दोनों देशों के बीच व्यापार भी लगातार बढ़ रहा है। भारत अज़रबैजान को चावल, दवाएं, मोबाइल फोन, मशीनरी और कई अन्य उत्पाद निर्यात करता है। दूसरी ओर, भारत अजरबैजान से कच्चा तेल भी आयात करता है। पिछले कुछ वर्षों में अज़रबैजान भारतीय फिल्म शूटिंग और पर्यटन के लिए भी एक लोकप्रिय गंतव्य बन गया है। यहां कई भारतीय फिल्मों की शूटिंग हुई है।
राजनीतिक निकटता के बावजूद सांस्कृतिक निकटता
हाल के वर्षों में पाकिस्तान के साथ अजरबैजान की बढ़ती नजदीकियां भारत के लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं है। लेकिन इतिहास बताता है कि राजनीतिक संबंध बदलते रहते हैं, जबकि सांस्कृतिक संबंध सदियों तक जीवित रहते हैं। अतेशगाह मंदिर, संस्कृत शिलालेख और गणेश मंत्र जैसे साक्ष्य बताते हैं कि भारत और अज़रबैजान के बीच संबंध न केवल राजनीतिक बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी घनिष्ठ रहे हैं।
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