ढाका में आग लगने से 1500 झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं. जिससे बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए.
कोरल बस्ती में लगी भीषण आग
हांगकांग में लगी भीषण आग की घटना दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गई. ऐसी ही एक घटना बांग्लादेश के ढाका में देखने को मिली है. यहां भी आग ने अपना रौद्र रूप दिखाया. ढाका के कोरल झुग्गी बस्ती में भीषण आग लग गई. अनुमान है कि करीब 1500 झोपड़ियां आग की चपेट में आ गईं. जिससे बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं. इस पूरी घटना में किसी की मौत की खबर सामने नहीं आई है.
काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया
ढाका में मंगलवार को आग लग गई. पूरी आग पर काबू पाने के लिए दमकलकर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। जिसके बाद आग पर काबू पाया गया. अग्निशमन सेवा और नागरिक सुरक्षा विभाग के ड्यूटी ऑफिसर राशेद बिन खालिद ने घटना की पुष्टि की है। अगलगी की घटना में अधिकतर घर जलकर खाक हो गये हैं. फायर सर्विस के निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद तलुजा इस्लाम चौधरी ने बताया कि आग से 1500 झोपड़ियां जलकर राख हो गई हैं.
ढाका का ‘धारावी’
कोरल स्लम ढाका की झुग्गियों का बड़ा नाम है. यहां 60 हजार परिवार रहते हैं. इनमें कुछ लोग ऐसे भी हैं जो जलवायु शरणार्थी के रूप में शहरों से गांवों की ओर चले गए हैं। यह झुग्गी ढाका के महंगे गुलशन और बनानी इलाके के पास है। जहां ऊंची-ऊंची इमारतें हैं. आग के कारण पूरा इलाका काले धुएं के बादलों से ढक गया। आसमान में ऊंची लौ दिखाई दे रही थी.
लोग यहाँ क्यों रहते हैं?
बांग्लादेश की राजधानी ढाका की जनसंख्या 2024 के आंकड़ों के अनुसार 1 करोड़ से अधिक थी। यह एक हजार से अधिक झोंपड़ियों का शहर है। गांवों में गरीबी, बेरोजगारी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी कठिनाइयां लोगों को झुग्गी-झोपड़ियों की ओर ले जाती हैं। यहां रिक्शा चालक, नौकरानी और सफाईकर्मी पाए जाते हैं।