ट्रम्प के विशेष दूत जेफ लैंड्री ने कहा है कि वह मार्च में ग्रीनलैंड का दौरा करेंगे और उन्हें विश्वास है कि इस मुद्दे को हल किया जा सकता है। डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक बार फिर बड़ा दावा सामने आया है. चर्चाओं के उलट अब यह साफ हो गया है कि ट्रंप मार्च तक ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए कोई कदम नहीं उठाने वाले हैं. लेकिन इसके बदले उनका एक नया और अलग प्लान सामने आया है, जिसे लेकर वैश्विक राजनीति में बहस गर्म हो गई है.
ट्रंप काफी समय से ग्रीनलैंड को लेकर बयान देते रहे हैं
दरअसल, ट्रंप काफी समय से ग्रीनलैंड को लेकर बयानबाजी करते आ रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने ग्रीनलैंड को संयुक्त राज्य अमेरिका में शामिल करने की इच्छा व्यक्त की, जिसका डेनमार्क ने कड़ा विरोध किया। अब ताजा जानकारी के मुताबिक ट्रंप का फोकस सीधे कब्जे की बजाय रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी पर है. सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड में निवेश, रक्षा सहयोग और खनिज संसाधनों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रहा है।
दुर्लभ खनिज, तेल और गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं
ग्रीनलैंड भले ही बर्फ से ढका क्षेत्र हो, लेकिन वहां दुर्लभ खनिज, तेल और गैस के विशाल भंडार हैं। साथ ही आर्कटिक क्षेत्र में इसकी भौगोलिक स्थिति अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। चीन और रूस की बढ़ती गतिविधियों के बीच अमेरिका ग्रीनलैंड में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है, लेकिन इस बार इसका रास्ता अधिक कूटनीतिक और व्यावहारिक बताया जा रहा है।
अमेरिका ग्रीनलैंड के बुनियादी ढांचे, सैन्य अड्डों और वाणिज्यिक परियोजनाओं में निवेश बढ़ा सकता है।
ट्रंप की नई योजना के तहत अमेरिका ग्रीनलैंड के बुनियादी ढांचे, सैन्य अड्डों और वाणिज्यिक परियोजनाओं में निवेश बढ़ा सकता है। साथ ही, स्थानीय प्रशासन के साथ अनुबंध करके दीर्घकालिक रणनीतिक उपस्थिति स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सीधे कब्जे से ज्यादा प्रभावी है और अंतरराष्ट्रीय विवादों को रोकने वाला भी साबित हो सकता है।
हालांकि पूरे मामले की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि ट्रंप फिलहाल ग्रीनलैंड पर कब्जे की बजाय ‘सॉफ्ट पावर’ और रणनीतिक साझेदारी की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले महीनों में उनकी नई योजना वैश्विक राजनीति में क्या रंग लाती है।
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